भागलपुर। भागलपुर और नवगछिया के बीच लाखों लोगों की लाइफलाइन माने जाने वाले विक्रमशिला सेतु को लेकर बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। बिहार सरकार ने सेतु पर तैयार किए गए बेली ब्रिज से 7 जून से हल्के वाहनों के परिचालन की अनुमति दे दी है। इस फैसले के बाद लंबे समय से परेशान आम यात्रियों को बड़ी सुविधा मिलने जा रही है।
पथ निर्माण मंत्री ई. शैलेंद्र ने जानकारी दी कि यह निर्णय आम लोगों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। उन्होंने बताया कि हाल ही में उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्वयं विक्रमशिला सेतु का निरीक्षण कर वहां चल रहे निर्माण कार्यों और बेली ब्रिज की स्थिति का जायजा लिया था। इसके बाद अधिकारियों से विस्तृत चर्चा के बाद यह निर्णय लिया गया।
सरकार के अनुसार शुरुआती चरण में केवल हल्के वाहन—जैसे कार, बाइक और जीप—को ही बेली ब्रिज से गुजरने की अनुमति होगी। भारी वाहनों और ओवरलोड गाड़ियों के परिचालन पर पूरी तरह रोक जारी रहेगी। प्रशासन का उद्देश्य सुरक्षित और सुचारु यातायात सुनिश्चित करना है।

विक्रमशिला सेतु पर आवागमन बाधित होने से भागलपुर, नवगछिया, कटिहार, पूर्णिया, मधेपुरा, सहरसा सहित कोसी और सीमांचल क्षेत्र के लाखों लोगों को लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। ऐसे में बेली ब्रिज से शुरू होने वाला यातायात लोगों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।
पथ निर्माण मंत्री ने बताया कि आने वाले समय में श्रावणी मेला और संभावित बाढ़ को देखते हुए फिलहाल अस्थायी व्यवस्था के रूप में बेली ब्रिज को शुरू किया जा रहा है। इससे यातायात सुचारु बना रहेगा और लोगों को वैकल्पिक मार्ग की सुविधा मिल सकेगी।
उन्होंने आगे बताया कि 15 सितंबर से विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त हिस्से पर ट्रस ब्रिज निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। इसके तहत पहले पुराने स्लैब को हटाया जाएगा और फिर तकनीकी मानकों के अनुसार नया ढांचा तैयार किया जाएगा। इसके बाद ढलाई और अन्य कार्य पूरे किए जाएंगे।
सरकार ने लक्ष्य रखा है कि नवंबर के अंत तक यानी 30 नवंबर तक सेतु पर सामान्य यातायात व्यवस्था बहाल कर दी जाए। हालांकि निर्माण कार्य के दौरान कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित हो सकता है, जिसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था पर काम किया जा रहा है।
मंत्री ने यह भी बताया कि विक्रमशिला सेतु पर बनाया गया बेली ब्रिज एक विशेष परियोजना है और देश में यह दूसरा उदाहरण है जब किसी बड़े पुल पर इस तकनीक का उपयोग किया गया है। इससे पहले लद्दाख क्षेत्र में सेना द्वारा इस तरह का प्रयोग किया गया था।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पूरे बिहार में पुलों और पुलियों की स्थिति की समीक्षा कर रही है। जहां भी मरम्मत या पुनर्निर्माण की आवश्यकता होगी, वहां प्राथमिकता के आधार पर काम कराया जाएगा। आधुनिक तकनीक की मदद से पुलों की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा, ताकि भविष्य में ऐसी समस्याओं से बचा जा सके।

