नवगछिया। गाय-बकरी पालन के लिए दो लाख रुपये तक का ऋण दिलाने का लालच देकर करीब 100 महिलाओं से 10 लाख रुपये से अधिक की ठगी करने वाले अंतरजिला गिरोह के पांच सदस्यों की गिरफ्तारी के बावजूद मामले का मुख्य सरगना अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। इससे पीड़ित महिलाओं में अपनी जमा राशि वापस मिलने को लेकर चिंता और संशय बढ़ गया है।
जानकारी के अनुसार छह जून को करीब 100 महिलाएं सामूहिक रूप से शिकायत लेकर थाना पहुंची थीं। बाद में उन्होंने नवगछिया एसपी वैभव शर्मा से मिलकर भी न्याय की गुहार लगाई थी। महिलाओं का आरोप था कि खुद को आईबीएल फाइनेंस लिमिटेड का कर्मचारी बताने वाले कुछ लोगों ने जीविका समूह की तर्ज पर समूह बनाकर 12 घंटे के भीतर दो लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराने का वादा किया था।
आरोपितों ने ऋण स्वीकृति के नाम पर आवेदन शुल्क, प्रोजेक्ट रिपोर्ट और प्रोसेसिंग फीस बताकर प्रत्येक महिला से 10-10 हजार रुपये जमा करा लिए। बाद में न तो ऋण मिला और न ही जमा की गई राशि वापस की गई।

मामले को गंभीरता से लेते हुए नवगछिया एसपी वैभव शर्मा के निर्देश पर गठित विशेष टीम ने कार्रवाई करते हुए मधेपुरा, पूर्णिया और कटिहार जिले से जुड़े पांच आरोपितों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने उनके पास से आठ मोबाइल फोन, 12 सिम कार्ड, एक स्कैनर, 10 हजार रुपये नकद, एक मोटरसाइकिल तथा कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए हैं।
पूछताछ के दौरान गिरफ्तार आरोपितों ने स्वीकार किया कि वे पिछले आठ-नौ दिनों से नवगछिया क्षेत्र में सक्रिय थे और लोगों को ऋण दिलाने का झांसा देकर पैसे वसूल रहे थे।
हालांकि गिरोह के पांच सदस्यों की गिरफ्तारी के बावजूद मुख्य मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी नहीं होने से पीड़ित महिलाओं की चिंता कम नहीं हुई है। महिलाएं लगातार थाना और एसपी कार्यालय का चक्कर लगा रही हैं तथा अपनी जमा राशि की वापसी की मांग कर रही हैं।
पीड़ितों का कहना है कि अब तक पुलिस की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि उनकी रकम कब और किस प्रक्रिया के तहत वापस कराई जाएगी। ऐसे में अब लोगों की नजरें साइबर थाना की अगली कार्रवाई और फरार मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी पर टिकी हुई हैं।

