भागलपुर। गंगा जलमार्ग पर भारी औद्योगिक परिवहन को लेकर एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की गई है। कोलकाता के डायमंड हार्बर बंदरगाह से रवाना हुआ 1668 मीट्रिक टन वजनी मेगा कार्गो भागलपुर और नवगछिया क्षेत्र से गुजरते हुए बरौनी रिफाइनरी की ओर बढ़ गया। तीन बड़े जलयानों में डेप्रोपेनाइजर, स्प्लिटर और डीथेनाइजर जैसी अत्याधुनिक औद्योगिक इकाइयों को सुरक्षित तरीके से पहुंचाया जा रहा है।


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भारत अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) की निगरानी में पूरे मार्ग पर जलस्तर, नौवहन मार्ग और तकनीकी सुरक्षा का लगातार आकलन किया गया, ताकि भारी कार्गो बिना किसी बाधा के अपने गंतव्य तक पहुंच सके।

713 किलोमीटर का जलमार्ग सफर

यह मेगा कार्गो कोलकाता के डायमंड हार्बर बंदरगाह से रवाना होकर राष्ट्रीय जलमार्ग-1 के जरिए लगभग 713 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए सिमरिया घाट पहुंचेगा। वहां से इन भारी उपकरणों को विशेष ट्रांसपोर्ट वाहनों के माध्यम से बरौनी रिफाइनरी तक पहुंचाया जाएगा।

कार्गो परिवहन में एमबी तोरसा, टग ग्वालियर और एमबी मैरिन-99 जैसे बड़े जलयान शामिल हैं। पूरे सफर के दौरान भारत अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण के क्षेत्रीय अधिकारी लगातार निगरानी करते रहे।

सुरक्षित आवाजाही के लिए जलस्तर पर विशेष नजर

इतने भारी कार्गो के सुरक्षित संचालन के लिए गंगा में पर्याप्त जलस्तर बनाए रखना आवश्यक होता है। अधिकारियों के अनुसार, जलयानों के संचालन के लिए कम से कम 1.6 मीटर जलगहराई जरूरी है। वहीं पुलों और हाईटेंशन बिजली लाइनों के नीचे से सुरक्षित गुजरने के लिए पानी की सतह से लगभग 11 मीटर का क्लियरेंस भी अनिवार्य होता है।

गंगा में पर्याप्त जलस्तर उपलब्ध रहने के कारण मेगा कार्गो को नवगछिया के मुख्य जलमार्ग से सुरक्षित रूप से आगे बढ़ाया गया। इस दौरान क्षेत्रीय कार्यालय की टीम लगातार जलयानों के संपर्क में रही और आवश्यक तकनीकी सहायता उपलब्ध कराती रही।

बरौनी रिफाइनरी के लिए क्यों अहम हैं ये उपकरण?

इस खेप में भेजे जा रहे डेप्रोपेनाइजर, स्प्लिटर और डीथेनाइजर आधुनिक तेल रिफाइनरी की महत्वपूर्ण प्रोसेसिंग इकाइयां हैं। इनकी मदद से गैस और हाइड्रोकार्बन मिश्रणों का अधिक कुशल प्रसंस्करण संभव होता है, जिससे रिफाइनरी की उत्पादन क्षमता और ईंधन शोधन की गुणवत्ता में सुधार होता है।

  • डेप्रोपेनाइजर गैस मिश्रण या कच्चे तेल से प्रोपेन को अलग करने का कार्य करता है।
  • स्प्लिटर विभिन्न हाइड्रोकार्बन को उनके क्वथनांक के आधार पर अलग-अलग उत्पादों में विभाजित करता है।
  • डीथेनाइजर गैस मिश्रण से एथेन को अलग करने की प्रक्रिया में उपयोग किया जाता है।

औद्योगिक परिवहन का मजबूत विकल्प बन रहा गंगा जलमार्ग

राष्ट्रीय जलमार्ग-1 पर लगातार बढ़ता भारी कार्गो परिवहन इस बात का संकेत है कि गंगा जलमार्ग अब देश के औद्योगिक लॉजिस्टिक्स नेटवर्क का एक मजबूत माध्यम बनता जा रहा है। जलमार्ग के जरिए भारी मशीनरी का परिवहन सड़क मार्ग की तुलना में अधिक सुरक्षित, किफायती और पर्यावरण के अनुकूल माना जाता है। इससे सड़क परिवहन पर दबाव कम होने के साथ उद्योगों को भी बेहतर लॉजिस्टिक सुविधा मिल रही है।

By न्यूज़ डेस्क

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