भागलपुर: केंद्र सरकार की ओर से सहकारिता क्षेत्र के आधुनिकीकरण की दिशा में चलाए जा रहे राष्ट्रीय कंप्यूटरीकरण अभियान का लाभ अब बिहार में तेजी से दिखाई देने लगा है। भागलपुर समेत पूरे राज्य की प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) को डिजिटल और पारदर्शी बनाने के लिए केंद्र सरकार अब तक 53.90 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता जारी कर चुकी है।
Total Downloads: 31
यह जानकारी केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में भागलपुर के जदयू सांसद अजय कुमार मंडल द्वारा पूछे गए अतारांकित प्रश्न संख्या-438 के लिखित उत्तर में दी।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि बिहार की 4,495 पैक्स समितियों को डिजिटल नेटवर्क से जोड़ने और आधुनिक सुविधाओं से लैस करने के लिए बड़े पैमाने पर कंप्यूटरीकरण और डिजिटलीकरण का कार्य किया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य पैक्स के कामकाज में पारदर्शिता बढ़ाना, वित्तीय प्रक्रियाओं को सरल बनाना और किसानों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराना है।

सांसद अजय कुमार मंडल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में ‘सहकार से समृद्धि’ का संकल्प तेजी से धरातल पर उतर रहा है। उन्होंने इसे किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
सांसद ने केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि भागलपुर जिले में कुल 788 पंजीकृत सहकारी समितियां हैं, जिनमें से 728 समितियां वर्तमान में सक्रिय होकर कार्य कर रही हैं। यह जिले में सहकारिता व्यवस्था की मजबूती को दर्शाता है।
राष्ट्रीय कंप्यूटरीकरण अभियान के तहत बिहार की 4,477 पैक्स समितियों को नए कंप्यूटर, प्रिंटर और अन्य आवश्यक हार्डवेयर उपलब्ध कराए जा चुके हैं। वहीं 4,482 पैक्स को कॉमन नेशनल ईआरपी (ERP) सॉफ्टवेयर से जोड़ दिया गया है, जिससे वित्तीय लेनदेन, लेखा-जोखा और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर अनाज खरीद की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और तेज होगी।
नई डिजिटल व्यवस्था के तहत पैक्स को राज्य सहकारी बैंक, जिला केंद्रीय सहकारी बैंक और नाबार्ड (NABARD) के नेटवर्क से भी जोड़ा जा रहा है। इससे किसानों, पशुपालकों और मत्स्य पालकों को ऋण, खाद-बीज, सरकारी योजनाओं और अन्य सहकारी सेवाओं का लाभ समय पर मिल सकेगा।
केंद्र सरकार का मानना है कि पैक्स के पूर्ण डिजिटलीकरण से बिचौलियों की भूमिका कम होगी, पारदर्शिता बढ़ेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। साथ ही पैक्स के माध्यम से बहुउद्देशीय सेवाओं का विस्तार कर गांवों में रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
