नवगछिया। नवगछिया अनुमंडल के किसानों पर इस समय दोहरी मार पड़ रही है। एक तरफ रंगरा, गोपालपुर, इस्माइलपुर और बिहपुर के बाढ़ प्रभावित इलाकों में केले समेत कई फसलें पानी में डूबकर बर्बाद हो रही हैं, वहीं दूसरी ओर गोपालपुर के धरहरा गांव में मिर्ची उत्पादक किसान उचित बाजार भाव नहीं मिलने से परेशान हैं। कहीं किसान खड़ी फसल को बर्बाद होते देखने को मजबूर हैं, तो कहीं लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है।
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बाढ़ के पानी में डूब गई केले की फसल
रंगरा, गोपालपुर, इस्माइलपुर और बिहपुर के कई इलाकों में बाढ़ के पानी ने केले की खेती को भारी नुकसान पहुंचाया है। कई खेतों में केले के पौधे लंबे समय से पानी में डूबे हैं। पानी में रहने से पौधे सड़ने लगे हैं, जबकि तेज बहाव और दलदली मिट्टी के कारण कई जगह पौधे जमीन पर गिर गए हैं।
केले की खेती किसानों की आय का एक बड़ा जरिया है। पौधे लगाने से लेकर फसल तैयार करने तक किसान हजारों रुपये खर्च करते हैं। महीनों की मेहनत के बाद जब फसल बाजार में बेचने के लिए तैयार होती है, उसी समय बाढ़ ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।

रंगरा क्षेत्र के किसान सिकंदर महलदार, मनोज कुमार और पंकज कुमार ने बताया कि बाढ़ के कारण केले के साथ पपीते की खेती को भी काफी नुकसान हुआ है। खेतों में पानी जमा रहने से पौधे कमजोर होकर गिर रहे हैं और तैयार हो रहे फल भी खराब होने लगे हैं।
किसानों का कहना है कि उन्होंने फसल पर काफी पैसा और मेहनत लगाई थी। उम्मीद थी कि तैयार फसल बेचकर परिवार का खर्च चलेगा, लेकिन अब खड़ी फसल उनकी आंखों के सामने बर्बाद हो रही है। कच्ची फसल बेचने की कोशिश करने पर भी लागत निकलना मुश्किल है।
गोपालपुर और इस्माइलपुर के बाढ़ प्रभावित इलाकों में केले के कई खेत लंबे समय से पानी में डूबे हैं। बिहपुर के भी कई क्षेत्रों में जलजमाव के कारण केले की फसल प्रभावित हुई है। किसानों के अनुसार, केले के अलावा पपीता, मिर्ची, भिंडी और मखाना जैसी फसलों को भी नुकसान पहुंचा है।
धरहरा में मिर्ची के दाम ने बढ़ाई परेशानी
दूसरी ओर, गोपालपुर प्रखंड के धरहरा गांव में मिर्ची की खेती करने वाले किसान बाजार भाव को लेकर परेशान हैं। गांव में 100 एकड़ से अधिक जमीन पर मिर्ची की खेती होती है। किसानों के अनुसार, एक एकड़ में मिर्ची की खेती करने में करीब 40 से 50 हजार रुपये तक खर्च आता है।
इसके बावजूद इस बार किसानों को मिर्ची का भाव महज 20 से 25 रुपये प्रति किलो मिल रहा है। मिर्ची की तुड़ाई के लिए मजदूरों को ही करीब 10 रुपये प्रति किलो देना पड़ रहा है। इसके अलावा परिवहन और अन्य खर्च अलग से हैं।
किसानों का कहना है कि मौजूदा बाजार भाव में मिर्ची बेचने के बाद उन्हें मुनाफा तो दूर, खेती की लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है।
किसान राजेश कुमार, विक्रम कुमार, राहुल कुमार और विनोद कुमार ने बताया कि कम कीमत के कारण कई किसान मिर्ची की तुड़ाई तक नहीं करा रहे हैं। खेत में लगी मिर्ची समय पर नहीं टूटने के कारण पककर लाल हो रही है और धीरे-धीरे खराब हो रही है।
मुआवजा और उचित बाजार की मांग
किसानों का कहना है कि बाढ़ का पानी उतरने के बाद खेत भले ही खाली हो जाएं, लेकिन बर्बाद फसल और खेती के लिए लिया गया कर्ज उनके सामने बड़ी समस्या बनकर रहेगा। किसानों ने प्रशासन से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फसल क्षति का सर्वे कराकर उचित मुआवजा और राहत देने की मांग की है।
वहीं धरहरा के मिर्ची उत्पादक किसानों ने संबंधित विभाग और प्रशासन से उचित बाजार उपलब्ध कराने तथा लागत के अनुरूप लाभकारी कीमत दिलाने की मांग की है, ताकि किसानों को अपनी उपज औने-पौने दाम पर बेचने या खेत में ही छोड़ने की मजबूरी न हो।
