विक्रमशिला सेतु बंद और गंगा का बढ़ा जलस्तर, दोहरी मार झेल रहे इस्माइलपुर के सब्जी किसान
नवगछिया। विक्रमशिला सेतु के बंद होने और गंगा नदी के जलस्तर में लगातार वृद्धि ने इस्माइलपुर प्रखंड के सब्जी उत्पादक किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। भागलपुर मंडी से सीधा संपर्क बाधित होने के कारण खेतों में तैयार सब्जियों को उचित बाजार नहीं मिल पा रहा है। स्थिति यह है कि किसानों को अपनी उपज लागत से भी कम कीमत पर बेचनी पड़ रही है।
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पहले इस्माइलपुर के किसान अहले सुबह बाइक या टोटो रिजर्व कर अपनी सब्जियां लेकर भागलपुर मंडी पहुंच जाते थे। भागलपुर और बांका के व्यापारी वहां किसानों से अच्छी कीमत पर सब्जियों की खरीदारी करते थे। इससे किसानों को अपनी मेहनत और लागत का बेहतर मूल्य मिल जाता था।
लेकिन विक्रमशिला सेतु बंद होने के बाद किसानों के लिए भागलपुर मंडी तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। दूसरी ओर, गंगा का जलस्तर बढ़ने से जाह्नवी घाट तक भी वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो गई है। सब्जियों का भारी बोझ लेकर पैदल मंडी तक जाना किसानों के लिए संभव नहीं है। मजबूरी में किसान स्थानीय हाई लेवल मंडी में ही अपनी उपज बिचौलियों के हाथों औने-पौने दाम पर बेच रहे हैं।

लागत भी नहीं निकल रही
किसान बोधी मंडल, भैरव मंडल और सदानंद मंडल ने बताया कि सब्जी उत्पादन में बीज, खाद, सिंचाई और मजदूरी पर काफी खर्च आता है। बाजार नहीं मिलने के कारण उन्हें इतनी कम कीमत मिल रही है कि कई बार उत्पादन की लागत भी नहीं निकल पा रही है।
किसानों ने बताया कि इस्माइलपुर क्षेत्र पहले से ही बाढ़ की मार झेल चुका है। बाढ़ के कारण बड़ी मात्रा में फसल बर्बाद हो गई। जो फसल बची है, उसे बेचने के लिए अब बाजार तक पहुंच नहीं मिल रही है। ऐसे में किसानों पर दोहरी मार पड़ रही है।
छठ से पहले बढ़ी चिंता
किसानों का कहना है कि छठ पर्व से पहले सब्जियों की मांग बढ़ जाती है। ऐसे समय में विक्रमशिला सेतु बंद होने से उन्हें सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसानों ने सवाल उठाया कि पर्व के ठीक पहले सेतु बंद होने से पहले वैकल्पिक व्यवस्था को मजबूत क्यों नहीं किया गया।
पीड़ित किसानों ने सरकार और प्रशासन से फसल नुकसान का सर्वे कराने, उचित मुआवजा देने और भागलपुर मंडी तक सब्जियां पहुंचाने के लिए वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग की है।
सेतु बंद होने से मकान निर्माण भी महंगा
विक्रमशिला सेतु बंद होने का असर सिर्फ किसानों तक सीमित नहीं है। आवागमन बाधित होने से निर्माण सामग्री की ढुलाई लागत बढ़ गई है, जिसके कारण ईंट, बालू, गिट्टी और अन्य निर्माण सामग्री के दामों में भी बढ़ोतरी हुई है।
इसका सीधा असर आम लोगों के घरेलू बजट पर पड़ रहा है। खासकर इस्माइलपुर के उन गरीब परिवारों की परेशानी बढ़ गई है, जिनका नाम इंदिरा आवास योजना में आया है। बढ़ी हुई निर्माण लागत के कारण इन परिवारों के सामने पक्का मकान बनाने की चुनौती खड़ी हो गई है।
स्थानीय लोगों और किसानों ने सरकार से विक्रमशिला सेतु से जुड़ी समस्या का जल्द समाधान करने तथा प्रभावित लोगों के लिए ठोस वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग की है।
