जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के नियम बदले, दो साल से अधिक की देरी पर कोर्ट का आदेश जरूरी
भागलपुर। बिहार में जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए विलंबित निबंधन की प्रक्रिया सख्त कर दी गई है। अब जन्म की घटना के दो वर्ष से अधिक समय बीतने के बाद जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश की जरूरत होगी। वहीं, जन्म के एक वर्ष बाद और दो वर्ष के भीतर निबंधन कराने के लिए जिला पदाधिकारी (डीएम), अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) या अधिकृत कार्यपालक दंडाधिकारी का आदेश आवश्यक होगा। नई व्यवस्था एक अक्टूबर 2026 से लागू हुई है।
Total Downloads: 386
जन्म-मृत्यु निबंधन अधिनियम में संशोधन
केंद्र सरकार ने जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1969 की धारा 13 में संशोधन किया है। इसका उद्देश्य जन्म और मृत्यु का समय पर निबंधन सुनिश्चित करना तथा देर से निबंधन के मामलों में सही तथ्यों का सत्यापन करना है। नए प्रावधान के तहत संबंधित अधिकारी को जन्म या मृत्यु से जुड़े तथ्यों की जांच के बाद ही अनुमति देनी होगी। संशोधन अधिनियम का विवरण“।
किस स्थिति में किसका आदेश जरूरी?
- जन्म के एक वर्ष के भीतर: निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार संबंधित जन्म-मृत्यु रजिस्ट्रार के यहां निबंधन कराया जा सकता है।
- एक वर्ष से अधिक और दो वर्ष तक: डीएम, एसडीओ या डीएम द्वारा अधिकृत कार्यपालक दंडाधिकारी का आदेश जरूरी होगा।
- दो वर्ष से अधिक की देरी: संबंधित क्षेत्राधिकार वाले प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद ही निबंधन हो सकेगा।
आवेदन से पहले दस्तावेजों की जानकारी लें
जन्म प्रमाण पत्र के लिए आवेदन करने वाले लोगों को जन्म से संबंधित उपलब्ध प्रमाण, माता-पिता के पहचान पत्र और स्थानीय निबंधन कार्यालय द्वारा मांगे गए अन्य दस्तावेज तैयार रखने चाहिए। देरी से निबंधन के मामलों में अतिरिक्त जांच और प्रक्रिया पूरी करनी पड़ सकती है।

आवेदन करने से पहले संबंधित नगर निकाय, पंचायत या जन्म-मृत्यु निबंधन कार्यालय से दस्तावेजों और शुल्क की वर्तमान सूची की पुष्टि कर लें। सभी मामलों में एक ही तरह के दस्तावेज अनिवार्य मानकर आवेदन न करें।
नए नियमों के कारण जिन लोगों के जन्म का निबंधन लंबे समय से लंबित है, उन्हें आवेदन करने से पहले संबंधित प्राधिकारी से प्रक्रिया की जानकारी लेनी चाहिए।
