गंगा का कहर: 14 पक्के मकान नदी में समाए, 30 से अधिक घरों पर अब भी कटाव का खतरा
खरीक। राघोपुर-काजीकोरैया तटबंध के रेलवे टैगिंग बांध के पास गंगा का कटाव फिलहाल थमा हुआ है, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है। रुक-रुककर हो रहे कटाव के कारण 30 से अधिक पक्के मकान अब भी नदी के मुहाने पर खड़े हैं। स्थिति ऐसी है कि कटाव बढ़ने पर ये मकान कभी भी गंगा में समा सकते हैं। हालांकि, रविवार दोपहर से सोमवार शाम तक एक भी नया घर नदी में नहीं कटा है। इससे ग्रामीणों को थोड़ी राहत जरूर मिली है, लेकिन गांव में दहशत का माहौल बना हुआ है।
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अब तक कटाव की चपेट में आकर 14 पक्के मकान नदी में समा चुके हैं। इसके अलावा पुरानी रेलवे लाइन का करीब 200 मीटर हिस्सा भी गंगा में विलीन हो चुका है। कई अन्य मकान क्षतिग्रस्त हैं और उनके आसपास लगातार खतरा बना हुआ है। ग्रामीणों को आशंका है कि अगर कटाव ने दोबारा रफ्तार पकड़ी तो भारी नुकसान हो सकता है।
30 से अधिक मकानों पर अब भी खतरा
राघोपुर पंचायत के छोटी अलालपुर गांव में गंगा के कटाव ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। कई परिवारों के घर नदी में समा चुके हैं, जबकि दूसरे परिवार अपने मकानों को बचाने की चिंता में हैं। घरों के नदी के मुहाने पर पहुंच जाने से लोगों की बेचैनी बढ़ गई है।

रविवार दोपहर से सोमवार शाम तक नए मकानों के नहीं कटने से कुछ राहत मिली है। इसके बावजूद ग्रामीणों को डर है कि जलधारा का रुख बदलने या कटाव तेज होने पर शेष मकानों को भी नुकसान पहुंच सकता है। गांव में लोग लगातार नदी की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
जल संसाधन विभाग करा रहा बचाव कार्य
कटाव को नियंत्रित करने के लिए जल संसाधन विभाग की ओर से युद्धस्तर पर बचाव कार्य कराया जा रहा है। विभाग के कार्यपालक अभियंता गौतम कुमार ने बताया कि गंगा के जलस्तर में लगातार कमी आ रही है। फिलहाल स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया है और पूरे इलाके की निगरानी की जा रही है।
हालांकि, ग्रामीणों की चिंता अभी कम नहीं हुई है। 14 पक्के मकानों के नदी में समाने और पुरानी रेलवे लाइन का हिस्सा कटने के बाद लोग चाहते हैं कि बचाव कार्य लगातार जारी रहे, ताकि बाकी घरों को बचाया जा सके।
त्योहार के मौसम में गांव में पसरा सन्नाटा
छोटी अलालपुर गांव में गंगा ने इस बार ऐसी तबाही मचाई है कि आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। नवरात्र के इस त्योहार के मौसम में, जब सामान्य तौर पर घरों और गलियों में मां दुर्गा के गीत गूंजते हैं, गांव में चिंता और सन्नाटा पसरा है।
जहां कभी बच्चे धूल में खेलते थे, वहां आज गंगा की विनाशकारी धारा बह रही है। जिन घरों में परिवारों की यादें और वर्षों की मेहनत जुड़ी थी, उनमें से कई अब नदी में समा चुके हैं। बचे हुए घरों पर मंडराते खतरे ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है।
कटाव से प्रभावित परिवारों के सामने रहने और भविष्य की व्यवस्था करने की चुनौती खड़ी हो गई है। ग्रामीणों के लिए यह केवल मकानों का नुकसान नहीं, बल्कि उनके वर्षों के बसे-बसाए जीवन और गांव की पहचान पर भी संकट है।
मुआवजे की मांग को लेकर बुधवार को धरना
कटाव और बाढ़ से प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा देने की मांग को लेकर बुधवार को छोटी अलालपुर गांव स्थित यात्री पड़ाव में एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। यह कार्यक्रम महागठबंधन संघर्ष समिति के बैनर तले आयोजित होगा।
सोमवार को गौतम कुमार प्रीतम, धर्मेंद्र कुमार शर्मा समेत अन्य लोगों ने खरीक के अंचल अधिकारी प्रवीण कुमार वत्स को सामूहिक हस्ताक्षरयुक्त आवेदन सौंपा। आवेदन के माध्यम से प्रभावित लोगों को उचित मुआवजा देने की मांग उठाई गई है।
धरना-प्रदर्शन में राजद, कांग्रेस समेत इंडिया महागठबंधन के नेताओं के शामिल होने की बात कही गई है। आयोजकों का उद्देश्य कटाव पीड़ितों की समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाना और प्रभावित परिवारों के लिए राहत एवं मुआवजे की मांग को प्रमुखता से उठाना है।
ग्रामीणों को बचाव और राहत की उम्मीद
गंगा कटाव के कारण छोटी अलालपुर के ग्रामीणों के सामने गंभीर संकट है। एक तरफ विभाग बचाव कार्य के जरिए कटाव नियंत्रित करने का प्रयास कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ प्रभावित परिवार अपने घर और संपत्ति खोने के बाद सहायता की उम्मीद लगाए हुए हैं।
फिलहाल कटाव की रफ्तार में कमी और जलस्तर घटने से कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन 30 से अधिक मकानों पर खतरा बरकरार है। ग्रामीणों की मांग है कि बचाव कार्य में तेजी बनाए रखी जाए और जिन परिवारों को नुकसान हुआ है, उन्हें उचित सहायता और मुआवजा दिया जाए।
