प्रदेश के प्राथमिक व मध्य विद्यालयों में पढ़ने वाले करीब 2.10 करोड़ बच्चों को अब किताबों के बदले पैसे नहीं बल्कि किताबे दी जाएंगी. इस साल बच्चों को किताबें खरीदने के लिए किसी तरह की राशि नहीं दी जायेगी. अगर किताबें खरीदने के लिए राशि देने के लिए केंद्र सरकार अपनी मंजूरी देती है तो अगले साल से इसे शुरू करने पर विचार किया जा सकता है.

मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह ने कहा है कि सितंबर महीने में स्कूली बच्चों के हाथ में पाठ्य पुस्तकें दे दी जायेंगी, लेकिन अब तक किताबें कौन छापेगा, कैसे जिला व प्रखंड स्तर पर किताबें पहुंचेंगी और फिर कैसे उसे स्कूलों तक ले जाया जायेगा, उस पर अंतिम रूप से कोई निर्णय नहीं लिया गया है. अब भी सवाल उठ रहा है कि एक महीने में कैसे बच्चों को किताबें मिलेगी.

सितंबर महीने में ही स्कूली बच्चों का छमाही मूल्यांकन होना है. बिना किताब के ही बच्चों का यह मूल्यांकन हो पायेगा. इसके बावजूद अगर अगले दो महीने में किताबें मिल भी जाती हैं तो शिक्षकों के ऊपर एक साल का पाठ्यक्रम पांच महीने में पूरा कराने की चुनौती होगी. गुणवत्तापूर्ण शिक्षा में लगी राज्य सरकार ऐसे में क्लास एक से आठ तक के बच्चों को कैसे गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा दे सकेगी यह सरकार की चुनौती होगी.

इससे पहले राज्य सरकार ने किताबों की जगह बच्चों को राशि देने के लिए कहा था. कहा गया था कि पोशाक, छात्रवृत्ति की राशि की तर्ज पर किताब की राशी भी सीधे बच्चों के बैंक खाते में जायेगी

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By न्यूज़ डेस्क

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