नवगछिया: नवगछिया के बोरवा कबीर आश्रम में चल रहे 27 वें वार्षिक अधिवेशन के अंतिम दिन इलाहाबाद से आये सदगुरू धर्मेंद्र साहब ने कहा कि मन शुद्ध नहीं हुआ तो आप जान लें कि आप धार्मिंक नहीं हैं. मन अशुद्ध रहने से मानव लोभी, व्यभिचारी और तामसी होता है. वास्तव में वह भटकाव की स्थिति में रहता है. लेकिन मन जब शुद्ध हो जाता है तो इंसान वास्तव में धार्मिक हो जाता है फिर उसका जीवन सफल हो जाता है. बाबा ने कहा कि सृष्टि के हर जीव में परमात्मा है. इसलिए दूसरों को भी स्वयंवत ही देखना चाहिए. इसके लिए मन की शुद्धता जरूरी है.

,, बोरवा कबीर आश्रम में तीन दिवसीय वार्षिक अधिवेशन संपन्न

मंगलवार को कटिहार से आये संत संजीवन साहेब, सूरत गुजराज से आये संत विवेक साहेब, इलाहाबाद से आये सत्येंद्र साहेब, वैशाली से आये रामाशंकर साहोब, बेगुसराय से आये बिहारी साहेब, कार्यक्रम के आयोजन व बोरवा करीब आश्रम के महंथ हीरामन साहेब ने भी अपना प्रवचन दिया. इस अवसर पर हीरामन साहब ने अपने प्रवचन में कहा कि इश्वर बाहर नहीं सबके अंदर हैं.

जन्म के समय सभी इंसान बराबर होते हैं लेकिन उस इंसान को समाज धीरे धीरे जाति और संप्रदाय में बांट देता है. हीरामन साबह ने सुकर्मों पर अपना प्रवचन दिया. कार्यक्रम की विधिवत समापन किया गया. इस अवसर पर बोरवा आश्रम के ब्रह्मचारी शंभुशरण साहेब, अजय साहेब, मंच संचालक कवि श्रवण बिहारी, मुखिया नीतू देवी, मुखिया प्रतिनिधि आमोद कुमार साहू आदि अन्य भी थे. इस अवसर पर जानकारी दी गयी कि सदगुरू कबीर का 14 वां सत्संग समारोह करारी तीनटंगा में 14 अप्रैल से आयोजित किया जायेगा.

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By Rishav Mishra Krishna

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