निगम में विकास हो न हो, लेकिन विकास के नाम पर यह सियासती अखाड़ा जरूर बन गया है। निगम में भ्रष्टाचार पर निगम प्रशासन के खिलाफ खड़ी मेयर सीमा साहा और डिप्टी मेयर राजेश वर्मा पर दो दिन पहले तंज कसने वाले विधायक अजीत शर्मा पर डिप्टी मेयर ने पलटवार किया है। मेयर-डिप्टी मेयर के विरोध को नौटंकी बताने वाले विधायक शर्मा से उन्होंने पूछा कि विधायक को भ्रष्टाचार उजागर होने से भय क्यों लग रहा है? वर्मा ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा, निगम के कामकाज पर डीएम से सीएम तक चिट्ठी भेजने के बाद भी जब कार्रवाई नहीं हुई तो भ्रष्टाचार के मुद्दे पर कोर्ट जाने की बात कही। लेकिन विधायक ने मेयर व खुद मेरे लिए ‘नाैटंकी’ शब्द का इस्तेमाल किया। यह गलत है। अगर उन्हें भ्रष्टाचार के खिलाफ हमारा खड़ा होना गलत लगता है तो ऐसी नौटंकी उन्हें बार-बार दिखने को मिलेगी। हमें अपनी जिम्मेदारी विधायक से समझने की जरूरत नहीं है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ खड़े होने वाले मेयर-डिप्टी मेयर की बात को ‘नौटंकी’ कहने वाले नगर विधायक अजीत शर्मा को डिप्टी मेयर ने दी चुनौती, कहा-
विधायक बताएं-दीपक भुवानियां से सुलह का कौन सा फार्मूला तय हुआ था ?
विधायक को मेरी चुनौती है कि क्या वह अपने काम का हिसाब दे सकेंगे?
विकास की चिंता करने वाले विधायक से जनता चुनाव में हिसाब लेगी। जनता विधायक को देख रही है। मैं उन्हें खुली चुनौती देता हूं कि क्या वे विकास पर अपना कामकाज बताने की स्थिति में हैं? यह भी स्पष्ट बता दूं कि इस बार निगम में उनका दबाव नहीं चलेगा। वे दबाव बना कर निगम से कोई काम नहीं करवा सकेंगे। विधानसभा चुनाव में वोट मांगते वक्त उन्होंने सड़क के मामले में भी बड़ी-बड़ी बातें की थी। भोलानाथ पुल पर भी उनका बयान हास्यास्पद है। कहा था, भोलानाथ पुल नहीं बनाया तो चुनाव नहीं लड़ूंगा। क्या अगली बार वे विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे?

जनता को दूंगा जवाब : अजीत शर्मा
डिप्टी मेयर पर आरोप लगाने वाले विधायक अजीत शर्मा से जब सवाल पूछा गया तो उन्होंने खुद को ‘सूरज’ बताया। कहा, समय आने पर जनता को जवाब दूंगा।
प्रेस कांफ्रेंस करते डिप्टी मेयर राजेश वर्मा।
जनता को अपने होटल के सामने जैसी सड़क कब तक देंगे विधायक
डिप्टी मेयर वर्मा ने कहा, विधायक ये भी बता दें कि उनके होटल के सामने जैसी सड़क जनता को कब तक नसीब होगी? राजनीतिक श्रेय लेने की होड़ में तो कई बार उन्होंने बड़े-बड़े बयान दिए। निगम की राजनीति में विधायक की ‘सक्रियता’ के पीछे का सच भी जनता जानती है। पूर्व मेयर दीपक भुवानियां के कार्यकाल में भी एक बार विधायक अचानक सक्रिय हुए थे, फिर सुलह हुई। बताया था, बड़े भाई-छोटे भाई का मामला है। अब कोई शिकायत नहीं। अब विधायक यही बता दें कि शिकायत दूर करने का कौन सा फार्मूला तय हुआ? गिले-शिकवे कैसे दूर हुए? यह बात तय है कि भ्रष्टाचार के मुद्दे पर मैं लड़ता रहूंगा। मेरे लिए अभी चार साल बाकी है, पर वे अपने कार्यकाल का नतीजा बताएं कि कितनी बार बिजली, सड़क, शिक्षा, पानी, सफाई व अन्य मुद्दों को लेकर आंदोलन किया या आवाज बुलंद की?


