भागलपुर जिला बल के सिपाही सूर्यसंगम सिंह (सिपाही संख्या-150) को समय पर छुट्टी नहीं मिली। इस कारण वह अपनी बीमार पत्नी काइलाज नहीं करा सका और उसकी मौत हो गई। सिपाही ने डीआईजी को आवेदन देकर पुलिस लाइन के प्रभारी सार्जेंट मेजर विनय कुमार सिंह और डे जमादार जगदीश मंडल को पत्नी की मौत का जिम्मेदार बताया है और उचित कार्रवाई की मांग की है।
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डीआईजी ने एसएसपी को मामले की जांच कर दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई का निर्देश दिया है।
सिपाही का कहना है कि 12 जुलाई को पता चला कि पत्नी गंभीर रूप से बीमार है। तत्काल एसएसपी से मिलकर इस बात की जानकारी दी और उनकेआवास पर मिलकर चार दिन का सीएल लिया।

इसके बाद छुट्टी पर जाने का अनुरोध डेजमादार और प्रभारी सार्जेंट मेजर से किया। डे जमादार ने कहा कि किसी भी परिस्थिति में अभी छुट्टी नहीं मिल सकती है। सिपाही ने आरोप लगाया कि डे जमादार ने उसके साथ अभद्रता से बात की और अपने ऑफिस से भगा दिया। इसके बादउसने सार्जेंट मेजर को इसकी सूचना दी। मेजर ने कहा कि अभी किसी दूसरे काम में व्यस्त हैं, कल अाना।

दूसरे दिन सुबह गया तो रिलीवर का बहाना बनाते हुए छुट्टी नहीं दी। जब उसने बताया कि एसएसपी ने चार दिन का सीएल स्वीकृत कर दिया है तो फिर मुझे क्यों नहीं छोड़ रहे हैं? इस पर सार्जेंट मेजर विवादकरने लगे। काफी अनुरोध के बाद14 जुलाई को दो दिन देरी से छुट्टीदी। इस बीच पत्नी की स्थिति बेहदखराब हो गई। 14 जुलाई की रात में उसे अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन उसकी मौत हो गई। डॉक्टर ने कहा कि अगर एक दिन पहले लेकर आते तो मरीज के बचने की संभावना थी। सिपाही ने बताया किपत्नी की मौत से उसका पूरा परिवार सदमे में है। बेटी की तबियत बिगड़गई है। डे जमादार और सार्जेंट मेजर समय पर छुट्टी दे देते तो वह पत्नीका इलाज करवा पाता।

ऐसे संवेदनहीन पदाधिकारियों पर कार्रवाई हो : अध्यक्षपुलिस मेंस एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश कुमार ने कहा किऐसे संवेदनहीन पुलिस पदाधिकारियों पर हर हाल में कार्रवाई होनी चाहिए। एसएसपी द्वारा छुट्टी स्वीकृत होने के बाद भी सिपाही को किस परिस्थिति में परवाना नहीं मिला, इसकी जांच हो। जांच में दोषी पाए गए पुलिस पदाधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। अगर विभागीय स्तर पर कार्रवाई नहीं होगी तो संघ इस मुद्दे को लेकर एसएसपी से मिलेगा।

