भागलपुर : तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय में उत्तरपुस्तिका व लिफाफे की खरीद में बड़ी अनियमितता के उजागर होने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन के होश उड़ गये हैं. 2.51 करोड़ की उत्तरपुस्तिका व लिफाफे की खरीद में न तो कोई प्रस्ताव मिला था और न ही खरीद के लिए कोई टेंडर निकाला. यह गड़बड़ी महालेखाकार की लेखा टीम ने पकड़ी है.


नवगछिया न्यूज़ WhatsApp Group

साथ ही लेखा टीम ने यह टिप्पणी की है कि व्यक्तिगत हित के लिए एक बड़ी राशि को व्यय में दिखा दिया गया है. सवाल उठना लाजिमी है कि वित्तीय परामर्शी और अन्य संबंधित अधिकारी आखिर किस काम के लिए नियुक्त किये गये थे. इतनी बड़ी गड़बड़ी होती रही, लेकिन वे अनजान बने रहे.

ऐसे की गयी वित्तीय अनियमितता और अनावश्यक खरीद: उत्तरपुस्तिका व लिफाफे की खरीद के लिए छह बार में कुल 25101765 रुपये का भुगतान प्रिंटिंग प्रेस को किया गया. एक से 25 लाख तक की खरीद के लिए सीमित निविदा निकालने का प्रावधान है और 25 लाख से ऊपर की खरीद के लिए दैनिक

समाचारपत्रों में विज्ञापन प्रकाशित करने का नियम है. लेकिन ऐसी कोई प्रक्रिया नहीं की गयी.

केवल 40 पृष्ठों के ब्लैंक आंसर बुक की खरीद के लिए छह विक्रेताओं से कोटेशन प्राप्त कर माहेश्वरी प्रिंटर्स मधेपुरा से 40 पृष्ठों वाली 11 लाख ब्लैंक आंसर बुक खरीदी गयी. मां तारा इंटरप्राइजेज से 32 पृष्ठों वाली ब्लैंक आंसर बुक खरीदी गयी. इसके लिए कोई कोटेशन भी प्राप्त नहीं किया गया. इसी तरह कागज लिफाफा व मार्क्स फाइल के लिए तीन कोटेशन नेशनल ऑफसेट कदमकुआं पटना, भवानी प्रेस कदमकुआं पटना और माहेश्वरी प्रिंटर्स मधेपुरा से प्राप्त किया गया. इसके बाद माहेश्वरी प्रिंटर्स मधेपुरा से खरीद की गयी.

न कोई प्रस्ताव और न संख्या का ही था उल्लेख: क्रय विक्रय समिति की बैठक कुलपति की अध्यक्षता में 30.3.13 को हुई थी. इसके प्रस्ताव संख्या चार में उल्लेख है कि उत्तरपुस्तिका की खरीद खुले बाजार से निविदा प्राप्त कर विहित प्रक्रिया अपनाते हुए छपाई करायी जाये. पृष्ठों की संख्या वाली कॉपी का कोई उल्लेख नहीं था कि कितनी संख्या में सादी उत्तरपुस्तिका की खरीद विवि प्रेस से अन्यत्र खरीदा जाना था. उक्त बैठक में लिफाफा और सादा कागज खरीद का कोई प्रस्ताव नहीं था. सादा कागज और लिफाफा खरीद करने की कोई मांग भी नहीं थी. क्योंकि तात्कालिक आवश्यकता नहीं दिखायी गयी थी.

विवि प्रेस कॉपी देने को तैयार, फिर भी बाहर से खरीद ली कॉपी
वर्ष 2012-13 से पहले और 2012-13 के बाद भी विवि प्रेस से ही कॉपियां छपती रही. विवि के परीक्षा विभाग द्वारा जितनी कॉपियों की मांग की जाती रही, विवि प्रेस उपलब्ध कराता रहा. इसी कड़ी में परीक्षा नियंत्रक ने विवि प्रेस प्रबंधक को पांच लाख सादी उत्तरपुस्तिका 20.3.2013 तक उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था. इस पर प्रेस प्रबंधक ने पत्र भेज कर सूचित किया कि कार्य क्षमता के अनुसार जून 2013 तक पांच लाख कॉपी परीक्षा विभाग को उपलब्ध करायी जा सकती है.

बावजूद इसके यह कार्य विवि प्रेस को नहीं सौंपा गया. इसकी जगह माहेश्वरी प्रिंटर्स मधेपुरा से पांच लाख कॉपियों की अापूर्ति 21.8.2013 को की गयी. छह लाख कॉपियों की आपूर्ति 7.11.2013 को की गयी.

बिहार वित्तीय नियमावली 2005 संशोधित के नियम 131 के अनुसार 25 लाख से ऊपर की खरीद के लिए निविदा का प्रावधान है, तो इसका उल्लंघन क्यों किया गया.

30.4.2013 तक सादी उत्तरपुस्तिका मां तारा इंटरप्राइजेज को देनी थी. लेकिन सितंबर 2016 तक आपूर्ति नहीं की गयी. क्योंकि संचिका व स्टॉक में इसका कहीं उल्लेख नहीं था. छह लाख कॉपियों की कीमत 72 लाख रुपये तय की गयी थी. बिना कॉपी आपूर्ति के 45 लाख रुपये मां तारा को दे दिया गया और समय पर आपूर्ति नहीं होने के बावजूद राशि वापसी की कार्रवाई विवि ने नहीं की.

15 हजार की खपत, पर 11 लाख कॉपी खरीदी
40 पृष्ठों की सादी उत्तरपुस्तिका का उपयोग सिर्फ एमए, एमएससी और एमकॉम में होता है. किसी भी सेमेस्टर में तीन हजार से अधिक विद्यार्थी नहीं थे. इनके पांच पेपर की ही परीक्षा होती है. प्रति छात्र सिर्फ 40 पृष्ठों की एक ही कॉपी दी जाती है. इस तरह हिसाब करें, तो 15 हजार कॉपी की ही परीक्षा में खपत थी. लेकिन बाहर से 11 लाख कॉपी की खरीद की गयी, जिसका कोई औचित्य नहीं था.

ऐसे हुआ भुगतान
40 पृष्ठों वाली सादी उत्तरपुस्तिका की खरीद के लिए कोई खुली निविदा का आमंत्रण नहीं किया गया. सिर्फ पांच विक्रेता से कोटेशन प्राप्त किया गया. माहेश्वरी प्रिंटर्स मधेपुरा का दर सबसे कम था और उसके बाद मां तारा इंटरप्राइजेज पटना का था. मां तारा इंटरप्राइजेज से छह लाख सादी उत्तरपुस्तिका (40 पृष्ठों वाली) की खरीद का प्रस्ताव 5.4.2013 को कुलपति द्वारा पारित किया गया.

इसके अंतर्गत 30.4.2013 तक कॉपियां विवि को आपूर्ति करनी थी. मां तारा को 45 लाख रुपये का भुगतान अग्रिम के रूप में देने के लिए 13.4.2013 को तत्कालीन फाइनांस ऑफिसर ने प्रस्ताव प्रस्तुत किया, जिस पर 15.4.2013 को कुलपति ने आदेश दिया और चेक संख्या 693556 दिनांक 15.4.2013 द्वारा भुगतान दिखाया गया. लेकिन मां तारा इंटरप्राइजेज द्वारा आज तक छह लाख सादी उत्तरपुस्तिका की आपूर्ति नहीं की गयी.

By न्यूज़ डेस्क

न्यूज़ को शेयर करे और कमेंट कर अपनी राय दे.....

Dinamobet
Dinamobet
Dinamobet
Dinamobet
Dinamobet
Dinamobet
Kulisbet
Kulisbet
Dinamobet
Dinamobet
Kulisbet
Kulisbet
Kulisbet giriş
Kulisbet güncel giriş
kralbet
Dinamobet
Dinamobet
Madridbet
Dinamobet
Dinamobet
Kulisbet
Matbet
Matbet