नहाय-खाय के साथ 24 घंटे का निर्जला जितिया व्रत शुरू हुआ। पुत्र की लंबी आयु के लिए माताएं यह व्रत करती हैं। सोमवार को सुबह से ही गंगा घाटों पर स्नान के लिए महिलाओं की भीड़ लगी रही। छोटी खंजरपुर सीढ़ी घाट, बरारी सीढ़ी घाट, हनुमान घाट सहित अन्य घाटों पर श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान किया। गंगा स्नान के बाद गंगा मैया की पूजा-अर्चना की। ग्रामीण इलाकों में व्रतियों ने तालाब व घरों में स्नान कर खल्ली, तेल, दातून देकर अपने पितरों को याद किया। फिर दाल-भात, झिंगली, खमरूआ की सब्जी और नाेनी का साग भोजन के रूप में लिया। इसके साथ ही 24 घंटे का निर्जला उपवास शुरू हुआ। मंगलवार को फल, पकवान आदि से डलिया भरेंगी। काशी पंचांग के अनुसार मंगलवार दोपहर 12:22 बजे और मिथिला पंचांग के अनुसार दोपहर 12:31 मिनट तक अष्टमी रहेगा। लेकिन व्रती बुधवार को पारण करेंगी।
बरारी पुल घाट पर सोमवार को गंगा स्नान करने के लिए उमड़ी व्रतियों की भीड़।
डलिया भरने के लिए लोगों ने की फलों की खरीदारी
मंगलवार को व्रती महिलाएं फल-पकवान, खाजा आदि से बांस की डलिया भरेंगी। इसे लेकर सोमवार को बाजार में फल, डलिया व पूजन सामग्री की खरीदारी के लिए भीड़ उमड़ पड़ी। सभी ने अपनी जरूरत के अनुसार खरीदारी की। लोग देर शाम तक खरीदारी करते रहे। तिलकामांझी बजरंगबली मंदिर के पुजारी पंडित आनंद झा ने बताया कि हिन्दू समाज में व्रत करने की प्राचीन परंपरा रही है, लेकिन जितिया पर्व का विशेष महत्व है। यह व्रत प्रत्येक वर्ष अश्विन कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को किया जाता है। पुत्रवती महिलाएं इस व्रत में 24 घंटे तक निर्जल व निराहार रहकर अपने संतान की मंगलकामना करती हैं।

