भागलपुर : घोघा में चल रहा सिंघु मंडल बालिका उच्च विद्यालय कई मायनों में खास है। इस स्कूल के सभी शिक्षक निश्शुल्क सेवादानी यानी अवैतनिक हैं। पिछले 17 सालों से ये शिक्षक सेवा और समर्पण की भावना से शिक्षा दान के अभियान में जुटे हैं। इनके समर्पण का ही फल है कि इस स्कूल की छात्रा मनीषा कुमारी मैट्रिक की परीक्षा में जिला टॉपर बनी थी। 150 वर्षों का इतिहास रचने वाली महादलित टोले की एक मात्र शिक्षित लड़की कोमल कुमारी भी इसी विद्यालय की छात्रा है। कोमल को भागलपुर एसएसपी आशिष भारती ने इसी साल 21 जुलाई को सिंघु मंडल बालिका उच्च विद्यालय परिसर में सम्मान समारोह आयोजित कर सम्मानित किया था।
घोघा और आसपास के क्षेत्रों के लिए यह एक मात्र बालिका स्कूल
स्कूल के स्थापना काल से ही सेवा देती आ रहीं प्रधानाध्यापिका पूजा रानी, शिक्षिका ज्योति कुमारी, शिक्षक ब्रह्मदेव मंडल कहते हैं कि विद्यालय में कुल सात अवैतनिक शिक्षक हैं। सब के सब आर्थिक तंगी के शिकार हैं। किसी की माली हालत अच्छी नहीं है। इसके बावजूद हमलोगों ने सेवा बंद नहीं की। सोचता हूं कि सेवा देना बंद कर दिया तो पठन-पाठन बाधित हो जाएगा। संभवत: स्कूल भी बंद हो जाएगा। घोघा और आसपास के क्षेत्रों के लिए यह एक मात्र बालिका स्कूल है। यहां माध्यमिक शिक्षा हेतु बच्चियां पढऩे आती हैं। स्कूल की स्थापना बाद से क्षेत्र में नारी शिक्षा को बढ़ावा मिला। इसी उद्देश्य से स्कूल की स्थापना भी की गई थी।

1999 में शुरू हुआ स्कूल, शिक्षा प्रेमी जगदीश मंडल ने रखी थी नींव
शिक्षा प्रेमी आठगांवा निवासी जगदीश मंडल ने अपनी निजी जमीन पर स्वर्गवासी पिता सिंघु मंडल के नाम पर 1999 में विद्यालय स्थापना की नींव रखी। उनके प्रयास से ही 2006 मेंं विद्यालय को संचालन का अधिकार प्राप्त हुआ और 2012 में बिहार विद्यालय परीक्षा समिति पटना द्वारा कोड मिला। इसके बाद 2012 से मैट्रिक की परीक्षा के लिए फार्म भी भरा जाने लगा। देखते ही देखते एक ऐसे स्कूल का स्वरूप तैयार हो गया जिसके सभी शिक्षक आज भी निश्शुल्क सेवादानी हैं। फिलहाल स्कूल में 286 छात्राएं हैं। इस विद्यालय की स्थापना के पूर्व अधिकांश अभिभावक प्राथमिक शिक्षा के बाद मजबूरन अपनी बेटियों की पढ़ाई बंद करा देते थे। यह देख समाजसेवी जगदीश मंडल ने सबसे पहले स्कूल स्थापना की नींव रखी। तदोपरांत घोघा की पांचों पंचायतों में शिक्षकों की तलाश शुरू की। इसमें जानीडीह, मिर्जापुर, साहपुर, आठगांवा के शिक्षकों ने रुचि दिखाई। इस तरह देखते ही देखते भवन निर्माण के साथ स्कूल में पठन-पाठन शुरू हो गया। स्कूल की स्थापना बाद पांचों पंचायतों की बेटियां माध्यमिक शिक्षा भी प्राप्त करने लगीं।

बोले जिला शिक्षा पदाधिकारी : जिला शिक्षा पदाधिकारी मधुसूदन पासवान ने कहा कि यह स्थापना अनुमति प्राप्त विद्यालय है, जिसका संचालन विद्यालय की प्रबंधन समिति करती है। शिक्षकों के वेतन या मानदेय की व्यवस्था भी समिति को ही करनी है। सरकार द्वारा यहां की बच्चियों को छात्रहित में चलाई जा रही साइकिल, पोषाक और छात्रवृत्ति का लाभ दिया जाता है। जितनी संख्या में स्कूल की बच्चियां फस्र्ट डिविजन से पास करेंगी उस हिसाब से सरकार विद्यालय को अनुदान राशि भी देती है।


