दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को देश में बाघों की संख्या का आंकड़ा घोषित किया और इधर बिहार के नाम एक बड़ी उपलब्धि दर्ज हो गई। एक था टाइगर और टाइगर जिंदा है की टैगलाइन को झुठलाते हुए आंकड़ों ने साबित किया कि बिहार में बाघों की बहार है। उन्हें यहां की आबोहवा से प्यार है।.
कुशल प्रबंधन में पांच टॉप राज्य

बाघों के कुशल प्रबंधन के मामले में बिहार का वाल्मीकि टाइगर रिजर्व पूर्वोत्तर राज्यों में शिखर पर है। जबकि पूरे देश में वह पांचवे पायदान पर है। प्रबंधन के मोर्चे पर बिहार को घेरने वालों को भी इन नतीजों ने फिर से सोचने को मजबूर कर दिया है। बाघों की गणना कई श्रेणियों में की जाती है। प्रभावी प्रबंधन की श्रेणी में मूल्यांकन हुआ तो बिहार ने अपने तमाम पड़ोसी राज्यों को पीछे छोड़ दिया। उससे ऊपर सिर्फ केरला, तामिलनाडु, मध्य प्रदेश और कर्नाटक हैं, जबकि उत्तराखंड 12वें, झारखंड 16वें और उत्तर प्रदेश 17वें पायदान पर है।

हर चार साल पर घोषित होने वाली जनसंख्या के क्रम में बिहार में वर्ष 2018 में बाघों की औसत संख्या 31 घोषित की गई है। यह आंकड़ा 26 से 37 के बीच है। जबकि वर्ष 2014 में औसत संख्या 28 दर्ज हुई थी और आंकड़ा 25 से 31 के मध्य था। प्रधान मुख्य वन संरक्षक डीके शुक्ला का कहना है कि राज्य में बाघों की औसत वृद्धि का प्रतिशत राष्ट्रीय औसत से अधिक है। राष्ट्रीय वृद्धि 8.32 प्रतिशत है, मगर बिहार में यह आंकड़ा 10.71 प्रतिशत है।.

नेपाल की सीमा से सटा वाल्मीकि टाइगर रिजर्व 901 वर्ग किलोमीटर में फैला है। हिमालय और तराई का यह जंक्शन स्थल अपनी खास जैव विविधता के लिए मशहूर हो गया है। इसी का नतीजा है कि बाघों ने इसे अपना आशियाना बना लिया है। दरअसल, बिहार वन विकास निगम (बीएफडीसी) के जमाने में इस आश्रयणी की हालत खस्ता थी। फिर इसे बिहार सरकार ने टाइगर रिजर्व घोषित कर इस पर पूरा फोकस किया। वर्ष 2006 में जब पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर बाघों की संख्या घोषित हुई तो वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में संख्या 10 थी।

2010 में यह आंकड़ा आठ दर्ज किया गया। तत्कालीन डीएफओ संतोष तिवारी के कार्यकाल में वहां काफी काम हुआ। आश्रयणी में कैमरे लगाए गए। नतीजा चौंकाने वाला था। वर्ष 2014 में जब फिर गणना हुई तो इस आश्रयणी में आंकड़ा 28 पहुंच चुका था। तब से लगातार यह टाइगर रिजर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी की प्राथमिकता में शुमार है। उपमुख्यमंत्री ने बिहार की इस उपलब्धि के लिए प्रधान मुख्य वन संरक्षक सहित सभी अधिकारियों को बधाई दी।.

ऐसे हुई थी बाघों की गिनती.

वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में बीते साल हुई बाघों की गिनती के लिए विभाग ने 498 स्थानों पर कैमरे लगाए। यह कैमरे 20 मेगा पिक्सल क्षमता के थे। 40 से 60 दिन की अवधि में इन कैमरों से बाघों की तस्वीरें ली गईं। फिर उनका अध्ययन कर गणना की गई। इस काम में विभाग ने ट्रैफिक इंडिया का तकनीकी सहयोग लिया।

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By न्यूज़ डेस्क

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