नगर के श्रीगोपाल गोशाला प्रांगण में चल रही श्रीम‌द्‌भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के सातवें और अंतिम दिन कथा सुनने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी थी। कथा में अनंत श्रीविभूषित जगतगुरु रामानुजाचार्य परम पूज्य बालक स्वामी केशवाचार्य जी महाराज ने कृष्ण व सुदामा के मित्रता की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि चरित्र से बड़ा दुनिया में कोई भी धन नहीं है, इसलिए अपने चरित्र को बर्बाद नहीं होने दें।


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जिस प्यार में काम आता है, उसमें दुर्गंध पैदा हो जाती

मां की कमी कोई पूरी नहीं कर सकता। बेटे को बनाने में जितना बड़ा हाथ मां का होता है। उतना बड़ा हाथ पिता का नहीं होता। हम अंग वासी दान देना जानते हैं, लेना नहीं। एक दोस्त अपने दोस्त से अगर दगा करता है, तो वह सुखी नहीं रह सकता। इसलिए दोस्त से दगा मत करना। उन्होंने कहा कि भोजन करते समय मुंह से आवाज नहीं आनी चाहिए, इससे घर में दरिद्रता आती है।

अपने जीवन को नाटकीय मत बनाओ। अगर मर्यादा में रहोगे तो भगवान भी तुम्हारे चरण चूमने आएंगे। तुम्हें जिस हाल में रखे उस हाल में सुखी रहो। अपने चरित्र को कभी बर्बाद नहीं होने देना, अगर तुम्हारे पास चरित्र है तो भगवान भी आएंगे। अगर आपका सब कुछ बवार्द होता है, तो होने दो लेकिन अपने चरित्र को बवार्द नहीं होने दो। जीते जी अपने मां-बाप को रोटी खिलाओ मरने के बाद पित्रपक्ष में रोटी खिलाने से क्या फायदा।

श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारी…भजन पर खूब झूमे श्रद्धालु

कथा के दौरान स्वामी जी ने अपने भजनों से श्रोताओं को खूब झुमाया। श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारी… हे नाथ नारायण वासुदेवा, हे गोविन्द हे गोपाल भजन पर श्रद्धालु खूब झूमे। इस आयोजन को सफल बनाने के लिए संयोजक स्वामी आगमानंद महाराज, सहसंयोजक सजन शर्मा ,विकास चौधरी, आयोजक दयाराम चौधरी अन्य ने अपना योगदान दिया।

By न्यूज़ डेस्क

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