दिल्ली : कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता और सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता संजीव कुमार सिंह ने कहा कि मोदी सरकार में छोटे और माध्यम वर्ग के व्यपारी त्रस्त हो गए हैं। एक तरफ अम्बानी और अडानी जैसे व्यपारी मोदी राज में जनता का खून चूस रहे हैं तो दूसरी तरफ आम व्यवसायी को अब लग रहा है कि व्यपार करना अपराध है। श्री सिंह ने इस बाबत कई बातों को उठाते हुए सरकार पर निशाना साधा है। प्रस्तुत है श्री सिंह का लिखा आलेख……………


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( 1 ) चुनाव के पहले tax terror  को समाप्त करने का वादा करने वाले मोदीजी ने अब उल्टा tax terror को कई गुना बढ़ा दिया है l

( 2 )  Income tax raid ,
search , seizure , scrutiny cases , reassessment , notices आदि अपनी चरम सीमा पर है l

( 3 ) पूरे देश मे भय का माहौल बना दिया है l मोदीजी खुद के गुणगाण मे , विदेश भ्रमण मे और प्रवचनों मे लिप्त है l जेटली रोज़ व्यापारियों को जैल मे डालने और परिणाम भुगतने की धमकी दे रहे है l

( 4 ) आज तक किसी भी सरकार ने इस तरह की हरकत नही की l जब विदेशो से काला  धन लाने के नाम पर फूटी कौड़ी भी  नही आई तो जेटली जी  अपना चेहरा छिपाने के लिये हम व्यापारियों के पीछे पड़ गये है l

( 5 ) यह दिखाया जा रहा है कि व्यापारी समाज भ्रस्ट है l लाखों लाखों करोड़ खा जाने वाले लोग , चुनाव मे बेशुमार काला धन खर्च करने वाले लोग , ईमानदारी का पाठ पढ़ा रहे है l

( 6 ) हम कर दाताऔ को ही कर चोर साबित करने मे लगे है , आतंक और मंदी का माहौल है,
भ्रष्ट अफसरों को मौज हो गई है l  निक्कमे , कामचोर , निर्ल्लज ,
भ्रष्ट , घूस खोर अधिकारीयों की पूरी फौज सक्रिय हो गई है l
घूसखोरी अपनी पराकाष्ठा पर है l कोई रोकटोक नही है , officers को  मनमानी करने की छूट है l

( 7 ) हम खुद capital लाते है, दिन रात मेहनत करके, खून पसीना बहाकर, चौबीसों घंटों चिंतित रहकर, अपनी सुख सुविधा  अपने health का ख़याल छोड़ कर काम मे लगे रहते है l व्यापार और केवल व्यापार l घर , परिवार , समाज, शिक्षा, स्वास्थ्य का सोच नही पाते, केवल काम की धुन l व्यापार के सिवा  कूछ भी नही l हमारे working hours समाप्त ही नही होते बस लगे ही रहते है l पूरी ताकत से और ताकत से भी ज्यादा कर लेते है l

( 8 ) और इस आपाधापी मे मालूम ही नही होता कि कब कौन सी बीमारी लग गई , और लगता है कि शरीर का भी सोचना चाहिये था l कितने समाजिक काम रह गये , घर परिवार का नही सोचा , केवल व्यापार और काम  का ही सोचा l जी तोड़ मेहनत करके चार पैसे जोड़ लिये पर काफी कूछ छूट जाता है l

( 9 ) पर एक संतोष रहता है कि हम कभी थके नही , काम करते गये , खुद काम मे लगे और बहुतों को काम दिया l कितने ही परिवारों का पालन पोषण हुआ l

( 10 ) किस तरह अपनी मेहनत से पूराने काम को या किसी नये business को  , तिल तिल कर  आगे बढ़ाया, असफलता का मुकाबला किया , कितने risk लिये , कितनी कठिन स्थिति से गुजरे , समय समय पर लिये  सटीक निर्णय आदि का ख़याल कितना संतोष देता है l पर कहीं से भी या किसी भी तरह कोई भी मंत्री हमारी देश हित मे भागीदारी का उल्लेख नही करता  l

( 11 )  लगता है इस देश मे व्यापार करना जैसे कोई अपराध या गुनाह है l इतने कानून बना दिये है , इतने license बना दिये है , इतने तरह की formalities है  कि इनका ठीक ठीक maintenance सम्भव ही नही है l इनमें ही ज्यादा  समय , और शक्ति  लग जाती है , कारोबार के लिये कम समय रह जाता है l

( 12 ) और यही से सरकारी अफसरों की मनमानी शुरू होती है l यहीं से घूसखोरी और भ्रष्टाचार का जन्म होता है l यह तो कानून बनाने वाले भी जानते है कि इतना सम्भव ही नही है l पर उनको इससे क्या ?
घूसखोरी और भ्रष्टचार को बढ़ावा देना ही जिनका मकसद है वे कभी भी सुधार नही चाहते l
जब मन किया notice भेज दिया , जब मन किया detalis माँगली , जब भी दिल किया पूछताछ के लिये चले आये l हमको तो आतंकवादियों से भी ज्यादा जिल्लत और अपमान सहना होता है l

( 13 ) और इससे क्या फायदा होता है , किसका भला होता है , क्या मकसद पूरा होता है , देश का समाज का कुछ भला होता है क्या ?  ये भ्रष्ट officers  लोग क्या  काम कर रहे है l ये देश को दीमक की तरह चाट रहे है , खोखला कर रहे है l

( 14 ) इस कारण कारोबारी समाज का शिक्षित नवजवान , और वर्तमान पीढी business मे रुचि नही ले रही है l दूसरों को काम दे सकने की छमता रखने वाले खुद काम माँग रहे है l आरामतलब जिंदगी की तमन्ना पनप रही है l बहूत ही भयावह स्थिति है l ये देश हित मे नही है l जिस समाज ने करोड़ों करोड़ों हाथों को काम दिया है उसका उदासीन होना खतरनाक है l

( 15 ) कितनी भी विदेशी पूँजी आजाये , कितने भी नये रोजगार पैदा हो जाये किंतु इसकी भरपाई सम्भव नही है l बिना मतलब के कानूनों को तुरंत समाप्त किया जाना चाहिये l single point taxation ही इसका उपाय है l

( 16 ) हम व्यापारी तो हाथ जोड़ कर tax देना चाहते है l पर इतने तरह के tax , इतने तरह के झंझट नही चाहते l जितना जरूरी हो एक साथ , एक ही जगह tax लगा देना चाहिये l हम खुशी खुशी देंगे l किंतु इन भ्रष्ट officers, inspectors, notices, licences, renewals, records maintainance आदि से मुक्ति चाहते है l

( 17 ) हम चाहते है इन एक नम्बर दो नम्बर के बही खातों और कच्चे पक्के बही खातों की समाप्ति हो l ये सब भ्रष्ट कानूनों और भ्रष्ट सरकारी अफसरों की देन है l हमको तो इस भ्रष्ट व्यवस्था मे लिप्त किया गया है , हमारी चाहत नही है बल्कि मजबूरी है l हम तो परेशान है , त्रस्त है और इसकी समाप्ति चाहते है l
( 18 ) हम middle class के छोटे बड़े कारोबारी शांति प्रिय लोग है l हमको अपने दो हाथों , अपनी मेहनत  और कार्य  कुशलता पर भरोसा है l हम जंगल मे मंगल कर सकते है l हम विदेशी capital या किसी reservation के मोहताज नही है l हम दंगा फ़साद , आगजनी , आंदोलन , हिंसा वाले लोग नही है l हम तो हाथ जोड़ कर माननीय प्रधान मंत्री मोदीजी से विनती करते है कि यदि हमारी मांगो मे ज़रा भी सचाई हो और यदि उनको लगे कि ये समय माँग है और सबसे बढ़कर यदि ये देश हित मे है तो ज़रूर से कृपया कानूनों की जटिलताओं से व्यापार को मुक्त करिये l हम व्यापारी समाज और ये देश हमेशा आपके ऋणी रहेंगे l

By Rishav Mishra Krishna

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