भागलपुर के पॉक्सो कोर्ट में रेप के दोषी दिलीप मंडल को 20 साल की सजा सुनाई गई। जज रोहित शंकर ने बुधवार को फैसला सुनाया। पॉक्सो कोर्ट में दोषी दिलीप मंडल पीड़िता से प्रेम होने की दलील देता रहा। वो कहता रहा कि हम दोनों के बीच अफेयर चल रहा था। लेकिन पॉक्सो कोर्ट ने पीड़िता के साथ हुई हैवानियत को रेप ही माना। कोर्ट ने सरकार को पीड़िता को 3 लाख देने का भी आदेश दिया है। साथ ही दोषी पर 10 हजार का आर्थिक दंड भी लगाया।
घर लौटने के दौरान दुष्कर्म
भागलपुर के नाथनगर थाना इलाके में 18 अप्रैल 2019 को पीड़िता अपनी मां के साथ खेत गई हुई थी। शाम में करीब पांच बजे उसकी मां ने पीड़िता को यह कहकर घर भेजा कि थोड़ी देर में आती हूं। घर जाने के दौरान रास्ते में ही दिलदारपुर गांव के दिलीप कुमार मंडल ने पीड़िता को पकड़ लिया और दुष्कर्म को अंजाम दिया। 19 अप्रैल की सुबह पीड़िता घर पहुंची और इसकी जानकारी माता-पिता को दी। अगले ही दिन 20 अप्रैल 2019 को नाथनगर थाने में मामला दर्ज किया गया। इसके बाद पुलिस ने आरोपी को घर से ही गिरफ्तार कर लिया।

चार्जशीट के 2 महीने के भीतर सजा
अभियोजन के तरफ से 7 लोगों ने गवाही दी। सभी ने दुष्कर्म होने की बात कही। गवाही के बाद 5 फरवरी 2021 को आरोप का गठन हुआ। इसके बाद दो महीने के अंदर सजा सुना दी गई। 22 मार्च 2021 को कोर्ट ने दोषी ठहराया। इसके बाद बुधवार को पॉक्सो कोर्ट में सजा सुनाई गई। कोर्ट में रोते हुए दोषी दिलीप मंडल ने कहा कि हम दोनों एक-दूसरे से प्यार करते थे। लड़की के माता-पिता ने झूठे केस में फंसाया है।
क्या है दोषी के पिता का आरोप
दोषी के पिता नागेश्वर मंडल ने कहा कि दोनों एक-दूसरे से प्रेम करते थे तो सजा सिर्फ मेरे बेटे को ही क्यों हुई। उन्होंने पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने 50 हजार रुपए मांगे थे, कहा था कि रुपए दे दो, दोनों की शादी करवा दूंगा। रुपए नहीं देने पर केस करके जेल भेज दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि लड़की के चाचा दारोगा थे, इसलिए मेरे बेटे को जेल हुई। अब CGM में लड़की के खिलाफ केस करूंगा।


