भागलपुर : शहर में 200 कराेड़ रुपए की लागत से बनने वाले सुपर स्पेशियलिटी हाॅस्पिटल के बिल्डिंग का निर्माण लगभग पूरा हाे गया है। बिजली, पानी, सीलिंग व लिफ्ट लगाने का काम चल रहा है। 11 ऑपरेशन थियेटर का निर्माण भी हाे रहा है। अस्पताल में सात तरह की गंभीर बीमारियाें का इलाज हाेगा। इनमें से दाे विभाग-हार्ट और नेफ्राेलाॅजी यानी किडनी संबंधी बीमारी के लिए अप्रैल से ओपीडी सेवा शुरू हाेनी है। लेकिन अब तक केवल दाे डाॅक्टर मायागंज अस्पताल में हैं, जिन्हें यहां भेजा जा सकता है।
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जबकि हर विभाग के लिए आठ-आठ डाॅक्टर, नर्स, पारा मेडिकल स्टाफ और अन्य कर्मचारियाें की नियुक्ति की जरूरत है। इन नियुक्तियाें के लिए अब तक काेई पहल भी नहीं हुई है। इसलिए अप्रैल में इस अस्पताल के चालू हाेने की संभावना नजर नहीं आ रही है। यह तीसरी बार हाेगा जब अस्पताल शुरू करने की समय सीमा खत्म हाेगी।
डाॅक्टराें व अन्य कर्मचारियाें की नियुक्ति भी राज्य के स्तर पर हाेनी है। हवाई सेवा नहीं हाेने और खराब सड़क के कारण भी बड़े स्पेशलिस्ट डाॅक्टर भागलपुर आना नहीं चाहते हैं। पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी चाैबे ने पहले जून 2020 में अस्पताल शुरू करने का टारगेट तय किया था। काेराेना कारण यह नहीं हाे पाया। दूसरी बार दिसंबर 2021 तक ओपीडी शुरू करने का टारगेट तय हुआ। फिर उसे बढ़ाकर अप्रैल 2022 किया गया।

अप्रैल से हार्ट और नेफ्राेलाॅजी के मरीजाें का हाेना है इलाज, दाे बार बढ़ चुकी है समय सीमा
- 200 कराेड़ रुपए की लागत से बन रहा है सुपर स्पेशियलिटी हाॅस्पिटल
- 7 विभाग खुलेंगे, आधुनिक उपकरण व विशेषण डाॅक्टर करेंगे इलाज
- 20 बेड पर हर विभाग में भर्ती किये जा सकेंगे मरीज
- 65 डाॅक्टराें और 150 से ज्यादा नर्साें की जरूरत हाेगी
हर विभाग के लिए आठ डाॅक्टराें और नर्सिंग स्टाफ की सुपर स्पेशियलिटी में है जरूरत
अस्पताल में हर विभाग में 20 बेड पर भर्ती मरीजाें के इलाज के लिए एक प्राेफेसर, एक एसाेसिएट प्राेफेसर, दाे असिस्टेंट प्राेफेसर और चार सीनियर रेजिडेंट की जरूरत हाेगी। यानी एक विभाग में न्यूनतम आठ डाॅक्टर चाहिए। इसके अलावा एनेस्थेटिक, रेडियाेलाॅजिस्ट व पैथाेलाॅजिस्ट समेत अन्य विभागाें के डाॅक्टर भी सपाेर्ट के लिए चाहिए। कुल मिलाकर 140 बेडाें पर सात तरह के गंभीर बीमारियाें के मरीजाें के इलाज के लिए कुल 65 डाॅक्टराें और 150 से ज्यादा नर्साें की जरूरत हाेगी।
एमआरआई मशीन जर्मनी से आएगी इकाे और अल्ट्रासांउड की मिली
अस्पताल के भवन निर्माण का कार्य त्रिवेणी कंट्रक्शन कर रही है। पांच एकड़ यानी 17 हजार 684 स्क्वायर वर्गफीट में 98 करोड़ रुपये की लागत से भवन का निर्माण हाे रहा है। बाकी राशि उपकरणाें व अन्य संसाधनाें की खरीद पर खर्च किए जाने हैं। भवन छह फ्लोर का है। इसमें सुपर स्पेशियलिटी विभागों के अलावा एमआरआई, सीटी स्कैन, एक्सरे व अन्य जांच के लिए अलग कमरे हैं।
जेएलएनएमसीएच में तैनात आईसीयू इंचार्ज डाॅ. महेश कुमार के जिम्मे अस्पताल में संसाधनाें काे जुटाने की जिम्मेदारी है। उन्हाेंने बताया कि एमआरआई मशीन जर्मनी से मंगाई जानी है। इसके लिए अलग से बिजली कनेक्शन लेना बाकी है। हार्ट के ऑपरेशन के लिए कैथ लैब व 11 ऑपरेशन थियेटर का निर्माण चल रहा है। इकाे जांच मशीन, अल्ट्रासाउंड मशीन और वेंटिलेटर मिल चुके हैं।
इन विभागाें में हाेगा इलाज
यहां नेफ्रोलॉजी, यूरोलॉजी, न्यूरो सर्जरी, कार्डियोलॉजी, कार्डियोलॉजी सर्जरी, ट्रामा वार्ड, वरीय नागरिकों के लिए जेरिएट्रिक्स विभाग का निर्माण हो रहा है। सभी विभागों में आधुनिक उपकरण लगाए जाएंगे। यात्रियों के ठहरने के लिए अलग भवन बनेगा।
दाे डाॅक्टर आ चुके हैं
डाॅक्टराें व अन्य कर्मियाें की नियुक्ति राज्य के स्तर पर हाेगी। अप्रैल में नेफ्राेलाॅजी व कार्डियाेलाॅजी ओपीडी शुरू करने का टारगेट है। ये दाे डाॅक्टर अभी हमारे यहां आ गए हैं। लेकिन बाहर से आनेवाले डाॅक्टराें के लिए आवास का निर्माण अभी नहीं हुआ है। स्पेशलिस्ट पहले यही पूछते हैं कि आवास का निर्माण हुआ है या नहीं। इसलिए हमलाेग उस याेजना पर भी काम कर रहे हैं।-डाॅ. उमा शंकर सिंह, प्रिंसिपल, जेएलएनएमसीएच
