नवगछिया : भागलपुर, मधेपुरा और पूर्णिया जिले के सीमाक्षेत्र पर अवस्थित मुक्तनगर ढोलबज्जा में सद्गुरु मुक्त स्वरूप देव साहेब के निर्वाण महोत्सव पर आयोजित तीन दिवसीय विश्व चेतना लोक कल्याण संत, कवि महासम्मेलन सममेलन का आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता पूर्वोत्तर बिहार के चर्चित संत योगेश ज्ञान स्वरूप तपस्वी ने किया। इस मौके पर दर्जनों संतो ने अपनी वाणी से श्रद्धालुओं को धर्म का मार्ग बताया।

संत आधार दास शास्त्री ने सत्संग में ज्ञान, धर्म और भक्ति पर प्रकाश डालते हुए भक्तों को सत्य एवं दायित्व का बोध कराया। उन्होंने कहा कि सत्संग से मनुष्य का कल्याण होता है। हर मनुष्य को चाहिये कि वे दुर्लभ मानव जीवन पाकर सदगुरू की शरण में जाकर नियमित रूप से सत्संग करें।

संत योगेश ज्ञान स्वरूप तपस्वी ने कहा सत’ का अर्थ है स्वयं का परम सत्य, और ‘संग’ का अर्थ है संगति। गाने की शक्ति उसमें निहित है, जितने अधिक लोग उपस्थित होंगे, समूह की ऊर्जा उतनी ही अधिक होगी, और आत्मा उतनी ही स्थिर और स्थिर हो जाएगी। उन्होंने कहा कि समाज,देश और विश्व को बचाना संतों का काम है। लेकिन सरकार संतों को अहमियत नहीं देती है जिसके कारण विश्व में संकट का दौर चल रहा है।

संत रतन स्वरूप शास्त्री ने कहा कि अनेकलोग सत्संग सुनने जाते हैं लेकिन ‘सत् को महत्व नहीं देते हैं। समारोह को महंत भुवनेश्वर गोस्वामी, महंत श्रीजय गोस्वामी, संत निर्मल गोस्वामी ने भी संबोधित किया। मौके पर गायक बिजेंद्र दास, मनोरंजन कुमार, योगेंद्र कुमार, मानकेश्वर दास, संजीव दास, नागेश्वर दास, लक्ष्मीकांत ब्रह्मचारी, मुकेश कुमार, प्रमोद दास समेत अन्य गायकों ने कई भक्ति गीत प्रस्तुत की।

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By न्यूज़ डेस्क

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