भागलपुर में सिर्फ 5 रुपए के लिए सैकड़ों किसान अपनी जिंदगी जोखिम में डालते हैं। मामला विक्रमशिला पुल से जुड़ा है। यहां नदी के बीच दियारा इलाके में खेती करने जाने के लिए रस्सी के सहारे 40 फीट ऊंचे पुल से नीचे उतरना पड़ता है। दिन भर काम करने के बाद उसी रस्सी के सहारे फिर ऊपर चढ़ते हैं।
रस्सी और पेड़ के सहारे नीचे उतरते हैं
महिलाएं और बच्चे भी शामिल रस्सी के सहारे ही खेत तक पहुंचते हैं। राघोपुर और राघोपुर बिंद टोला इलाके के करीब 400 किसानों का हर दिन का यह रूटिन है । सभी किसान एक साथ अपने गांव से उस पुल के ऊपर आते हैं। फिर रस्सी और पेड़ के सहारे नदी के बीच दियारा इलाके में उतरते हैं। वहां लोगों ने करीब 150 झोपड़ी बना रखी है। दिन में खेती करने के बाद आराम करते हैं। साइकिल को भी विक्रमशिला पुल के किनारे लगे रोड में ही लटका कर बांध देते है।
क्या कहते हैं किसान
किसान करपुरी महतो कहते हैं कि पिछले 5 साल से डेली ऐसे ही नीचे उतरते हैं। दिन भर खेती करते हैं। फिर शाम को ऊपर चढ़ कर घर चले जाते हैं। वो कहते हैं कि उन्हें मौत से डर नहीं लगता है। अगर डरेंगे तो अपने परिवार का पेट कैसे चलाएंगे। उन्होंने बताया कि वहां आने के लिए नाव चलती है। लेकिन नाव वाला 5 रुपए लेता है। आने-जाने में 10 रुपए लगते है। यही वजह है कि रस्सी और पेड़ के सहारे नदी के बीच वाले दियारा इलाके में उतरते हैं।

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परवल और मकई की खेती
मंजुला देवी कहती हैं कि उतरने या चढ़ने के दौरान गिर जाएंगे तो मर जाएंगे। इसमें डरना क्या है। इतना डरेंगे तो बाल-बच्चा क्या खाएगा। उन्होंने कहा कि वो नीचे परवल और मकई का खेती करती हैं। उन्होंने कहा कि करीब 8 साल पहले सरकार नाव देती थी तो फ्री में जा सकते थे। लेकिन, जब से सरकारी नाव बंद हुई है। रस्सी के सहारे ही उतरते और चढ़ते हैं।
कम पानी में पैदल भी आ जाते थे
वहीं, सुरेश मंडल ने बताया कि वो नीचे परवल की खेती करते हैं। उन्होंने कहा कि जब कम पानी होता है तो हम ऐसे ही पैदल चले आते थे। लेकिन, अभी पानी ज्यादा है तो रस्सी और पेड़ के सहारे ही उतरते हैं।

