नवगछिया: जीवित्पुत्रिका (जियुतिया) व्रत 2023 अश्विन कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि को जीवित्पुत्रिका व्रत किया जाता है। इस दिन माताएं अपनी संतान के दीर्घ आयु, आरोग्य और सुखी जीवन के लिए निर्जला व्रत रखती हैं।
ज्योतिषाचार्य दयानंद पांडेय कहते है अश्विन माह कृष्णपक्ष के सातवें दिन नहाय-खाय के साथ इस व्रत की शुरुआत होती है। अगले दिन अष्टमी तिथि को, जीवित्पुत्रिका दिवस पर, निर्जला उपवास किया जाता है। तीसरे दिन सूर्योदय के बाद नवमी तिथि में पारण के साथ व्रत का समापन होता है। इस व्रत में नोनी की साग और मडुआ का विशेष महत्व है।
सप्तमी संयुता अष्टमी विचार – ‘सप्तमीसंयुताअष्टमी नित्यं शोकसंतापकारिणीम अर्थात् सप्तमी तिथि से युक्त अष्टमी तिथि नित्य शोक तथा संताप को करनेवाली होती है।

पंडित अजीत पांडेय ने बताया कि
जीवित्पुत्रिका व्रत तिथि निर्णय – व्रत कब करें? ‘वर्जनीया प्रयत्नेन मनुजैः शुभकांक्षीभि:’ अर्थात् सप्तमी मिश्रित अष्टमी को शुभ की इच्छा वाले मनुष्यों को प्रयत्न से त्यागना चाहिए। सप्तमी कलया यत्र परताश्चष्टमी भवेत। तेन शल्यमिदं प्रोक्तं पुत्रपौत्र क्षयप्रदं ।। अर्थात जहाँ पर कलामात्र भी सप्तमी से पर अष्टमी हो उसको शल्य कहा जाता है। जो पुत्र और पौत्र को क्षय करने वाली है। सप्तमी सहित अष्टमी तो पुत्रों का नाश करती है। उपन्न हुए और न उत्पन्न हुओं का भी नाश करती है।
अर्थात् सप्तमी युक्त अष्टमी तिथि को जीवित्पुत्रिका व्रत न करें। “अष्टम्यामुदिते सूर्ये दिनान्ते नवमी भवेत, तत्र पूजनीया प्रयत्नतः ।” अर्थात् अष्टमी तिथि में सूर्य के उदय होने पर तथा दिनान्त में नवमी तिथि हो वह प्रयत्न से पूजनीय होती है।
पंडित नीरज शर्मा ने कहा
इस वर्ष 6 अक्टूबर 2023, शुक्रवार को सुबह 9 बजकर 25 मिनट तक ही सप्तमी तिथि है। उसके बाद अष्टमी तिथि लग जा रहा है। बावजूद इस दिन जीवित्पुत्रिका व्रत का उपवास नहीं करना चाहिए। बल्कि इस दिन नहाय-खाय के साथ व्रत का शुरुआत करना चाहिए।
7 अक्टूबर 2023, शनिवार को सूर्योदय अष्टमी तिथि में हो रहा है। यह अष्टमी तिथि दिन के 10 बजकर 21 मिनट तक रहती है। उसके बाद नवमी तिथि का प्रवेश हो जा रहा है। अतः 7 अक्टूबर 2023, शनिवार को ही जीवित्पुत्रिका व्रत का दिवा – रात्रि निर्जला उपवास करना है।
हमारे धर्मग्रंथों का यही मत है। कोई संशय न रखें।

