ढोलबज्जा : सोमवार की मध्यरात्रि रात करीब 12 बजे तेज हवाओं के साथ हुई बारिश के कारण नवगछिया प्रखंड के कोसी पार ढोलबज्जा व खैरपुर कदवा पंचायत के कोसी सैकडों एकड़ में लगे केले की फसल बर्बाद हो गए हैं. फसलों की बर्बादी को देख किसान छाती पीट पीट कर रो रहे हैं. किसान अचल कुमार सिन्हा ने बताया- अलग-अलग खेतों में कुल 5 बीघा केले की खेती किया है. जहां एक एकड़ में सिर्फ एक केला का पौधा बचा हुआ है. सभी पौधे आंधी बारिश में टूटकर गिर गए हैं. अपने फसलों की क्षति देख ढोलबज्जा दियारा निवासी मसोमात आलखा देवी की स्थिति काफी नाजुक थी.

वह बार-बार रौंदते मुंह बोल रही थी- 15 कट्ठा खेत में केला की खेती की थी जो आंधी बारिश में एक भी नहीं बची. कई दिनों से बीमार पड़ी हूं. पर इलाज के लिए अपने खातिर दवाई नहीं लाकर, घर से सारा मकई बेच उसकी पैसा केले की खेती में यह सोचकर लगा दिया कि इस बार फसल केले फसल अच्छी है जो, सावन से पहले तैयार होकर अच्छी मुनाफा देंगे और किसी तरह एक बेटी है उसकी शादी कर देंगे. पर सब कुछ आपदा ने लूट लिया. वहीं किसान चंदन कुमार, अरविंद कुमार, संजय मंडल, पवन कुमार, नंदन कुमार, संजीव कुमार, चुनो मंडल, सुखदेव, गंगाधर मंडल, नंदकिशोर मंडल, रितेश कुमार, मसोमात मधु देवी, बिहारी शर्मा व भावेश कुमार के साथ दर्जनों किसानों ने कहा- ढोलबज्जा व खैरपुर कदवा पंचायत के करीब 250 एकड़ में लगे केले की फसल आंधी बारिश से बर्बाद हुए हैं. इससे किसानों को कम से कम एक करोड़ का मुनाफा होता.

जो किसान अपने नीजी जमीनों में खेती किए हैं उसे 40-50 हजार व लीज पर लेकर खेती करने वाले किसानों को 80-85 पचास हजार रुपए बीघा तक का खर्च पड़ता है. अब इस बर्बादी से आधा खर्च भी ऊपर होने वाला नहीं है. अगर सरकार द्वारा हम किसानों को इस बार क्षतिपूर्ति नहीं मिली तो, हम सब किसान आत्महत्या करने पर मजबूर होंगे. उक्त बातों को लेकर प्रखंड कृषि पदाधिकारी अनिल कुमार ने कहा कि आंधी-बारिश से जो केले की फसलों की क्षति हुई है. इसकी रिपोर्ट वरीय अधिकारियों को दे दी गई है. इधर छात्रनेता प्रशांत कुमार कन्हैया ने कहा कि कोसी पार के लिये यह बड़ी क्षति है. अगर किसानों को मुआवजा नहीं मिला तो वे लोग आत्महत्या करने को मजबूर हो जाएंगे.

क्या कहते हैं किसान सलाहकार

खैरपुर कदवा के किसान सलाहकार बालमुकुंद कुमार मंडल से पूछे जाने पर उन्होंने बताया- बुधवार के दिन कृषि विभाग से कुछ टीम आयेगी. जिसके साथ पंचायत के हर खेतों जा-जाकर फसलों के क्षति की जांच कर किसानों से कागजात लिए जायेंगे. यह काम लगातार दस दिन तक चलेगा. जांच के बाद विभागीय कार्रवाई कर किसानों को मुआवजा दिलाने का भी प्रयास किया जायेगा.

 

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By Rishav Mishra Krishna

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