11 साल बाद भी अंधेरे में बाबा विशुराउत सेतु, 73 स्ट्रीट लाइट के फाउंडेशन बने शोपीस
नवगछिया। कोसी नदी पर बने बाबा विशुराउत सेतु पर उद्घाटन के 11 साल बाद भी स्थायी प्रकाश व्यवस्था नहीं हो सकी है। पुल निर्माण के दौरान डिवाइडर में करीब 73 स्ट्रीट लाइट लगाने के लिए फाउंडेशन तैयार किए गए थे, लेकिन अब तक एक भी लाइट पोल नहीं लगाया गया है। हैरानी की बात यह है कि पुल पर रोशनी की व्यवस्था कराने की जिम्मेदारी को लेकर संबंधित विभाग एक-दूसरे की ओर इशारा कर रहे हैं।
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बाबा विशुराउत सेतु का उद्घाटन 17 मई 2015 को तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किया था। निर्माण के समय ही पुल पर स्थायी प्रकाश व्यवस्था किए जाने की उम्मीद थी। लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी यह व्यवस्था धरातल पर नहीं उतर सकी है। पुल के डिवाइडर में बने फाउंडेशन आज भी लाइट लगने का इंतजार कर रहे हैं।
73 पोल लगाने की तैयारी, फिर भी नहीं हुई रोशनी
पुल निर्माण के समय करीब 73 स्ट्रीट लाइट लगाने के लिए फाउंडेशन बनाए गए थे। इसके बावजूद अब तक पोल और लाइट नहीं लगाए जाने से सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतने वर्षों तक यह काम क्यों लंबित रहा। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब निर्माण के दौरान ही प्रकाश व्यवस्था के लिए आधार तैयार कर दिया गया था, तो लाइट लगाने में इतनी देरी क्यों हो रही है?

लोगों के अनुसार, संबंधित विभागों के बीच जिम्मेदारी स्पष्ट नहीं होने के कारण मामला आगे नहीं बढ़ पा रहा है। विभागीय समन्वय के अभाव में महत्वपूर्ण काम लंबित है और इसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
आरओबी पर भी नहीं लगी स्थायी स्ट्रीट लाइट
वर्ष 2017 में निर्मित करीब 633.75 मीटर लंबे रेल उपगामी सेतु (आरओबी) पर भी प्रकाश व्यवस्था के लिए निर्माण के समय आधार तैयार किया गया था। इसके बावजूद यहां भी अब तक स्थायी स्ट्रीट लाइट नहीं लग सकी है। बाबा विशुराउत सेतु और आरओबी जैसे महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग रात में पर्याप्त रोशनी के बिना संचालित हो रहे हैं।
स्थानीय लोगों और समाजसेवियों ने सरकार एवं जिला प्रशासन से दोनों पुलों पर जल्द स्थायी एलईडी स्ट्रीट लाइट लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर जिम्मेदारी तय की जाए, ताकि वर्षों से लंबित काम पूरा हो सके।
बारिश और कोहरे में बढ़ जाता है दुर्घटना का खतरा
रात में पर्याप्त रोशनी नहीं होने से वाहन चालकों को आवागमन में परेशानी होती है। बारिश, धुंध और कोहरे के दौरान दुर्घटना का खतरा और बढ़ सकता है। इस मार्ग से मालवाहक वाहनों, बसों, एंबुलेंस, कारों और दोपहिया वाहनों समेत बड़ी संख्या में वाहनों की आवाजाही होती है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, पुल पर अंधेरा केवल यातायात की समस्या नहीं, बल्कि सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। रात में महिलाओं, विद्यार्थियों, मरीजों और रोजाना यात्रा करने वाले लोगों को भी परेशानी होती है।
विभागीय खींचतान खत्म कर जल्द लगाई जाएं लाइटें
स्थानीय लोगों और समाजसेवियों ने सरकार एवं प्रशासन से मांग की है कि बाबा विशुराउत सेतु और आरओबी पर प्रकाश व्यवस्था के लिए संबंधित विभागों की जिम्मेदारी तय की जाए। लोगों का कहना है कि जब लाइट लगाने के लिए पहले से फाउंडेशन तैयार हैं, तो विभागीय अड़चनों को दूर कर जल्द काम शुरू किया जाना चाहिए।
लोगों को उम्मीद है कि दोनों पुलों पर स्थायी एलईडी स्ट्रीट लाइट लगने से रात में आवागमन सुरक्षित होगा और दुर्घटनाओं की आशंका कम करने में मदद मिलेगी।
