खरीक : खरीक और से लापता चार युवकों की गोली मारकर हत्या कर शवों को गंगा में बहा देने की हैरतअंगेज घटना से नरकटिया और गौरीपुर के लोग स्तब्ध है. बेटे की एक झलक पाने को वृद्ध पिता आतुर है. जबसे हत्या की घटना की सूचना मिली उसी समय से नरकटिया के मृतक युवक प्रदीप कुमार झा के 80 वर्षीय वृद्ध पिता शिव शंकर झा और माता रेणु देवी का बुरा हाल है. बेटे की आस में वृद्ध पिता शिव शंकर झा और प्रदीप की मां रेनू देवी की आंखें पथरा गई है. झोपड़ी झोपड़ी में एक चौकी पर कंबल ओढ़े प्रदीप का पिता शिव शंकर झा अंदर ही अंदर शिक्षक रहे थे. एक पड़ोसी ने जब उनसे कहा शिबू चाचा आपसे कोई मिलने आए है .कंबल के अंदर सिसकते हुए आवाज आई आए तो ढेरों लोग लेकिन कोई मेरे लाल को ला देगा. जब से बेटे की हत्या की घटना की सूचना मिली तब से प्रदीप की मां रेणु देवी और पिता शिव शंकर झा अपने मुंह में अनाज का एक दाना नहीं दिया. 1 सप्ताह से कुछ नहीं खाने से प्रदीप की मां और पिता का बुरा हाल है. हाथ पैरों में ऐंठनठन रही थी.
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वृद्ध पिता अपने युवा पुत्र की निर्मम हत्या की घटना के सदमे को पचा नहीं पा रहे हैं. पिता को यकीन नहीं हो रहा है कि उसका पुत्र अब इस दुनिया में नहीं रहा. बुदबुदाते हुए फिर कहते हैं के पूना चला गया होगा. प्रदीप का रिजर्वेशन 18 नवंबर को था. तेरा नंबर को प्रदीप अपने वृद्ध पिता से कह कर गया था 2 घंटे में आ जाएंगे. जाने से पहले प्रदीप ने अपना जैकेट खोल कर रख दिया था. लेकिन उनके साथियों के चक्कर में गया तो वापस लौट कर अभी तक नहीं आया. प्रदीप पिता के ठीक सामने चौकी के बेड पर सोता था. जिस दिन से प्रदीप लापता हुआ उसी दिन 13 नवंबर की रात 8:30 बजे के बाद से घर में मातमी सन्नाटा छाया हुआ हुआ है .मां रेनू देवी बेशुध हो गई है.प्रदीप का पिता शिव शंकर झा बार-बार कहते हैं कि कोई मेरे लाडले पारो से मिला दो. कौन कहता है मेरा बच्चा मर गया.अरे वह तो मुझे चिढ़ाने के लिए मुझसे दूर चला गया कि पापा मुझे डाटेंगे. वह बोल कर गया था 2 घंटे में आ जाएंगे .प्रदीप पुणे में 18000 रुपये प्रतिमाह कमाता था. कुछ ही महीने से काम कर रहा था.

घर की हालत सुधरने लगी थी. हाल ही में पुणे से वह नरकटिया आया था. घर की माली हालत बहुत ही खराब है फूस की झोपड़ी में मां पिता और भाई भाभी सब रह रहे हैं.ऊपर छपरी भी ठीक नही है. प्रदीप पैसे कमा कर एक अच्छा घर बनाना चाह रहा था. कुछ पैसे उसके पास जमा हो गए थे. पिता शिव शंकर जाने प्रदीप से कहा था गाड़ी मत खरीदो तुम कमाने पूना चला जाओगे इसका घर पर क्या उपयोग होगा डब्बा बनकर रह जाएगा लेकिन बेटे ने कहा था पिता जी जाने आने में दिक्कत होता है इतने कम पैसे में घर भी पूरे नहीं होंगे इस बार गाड़ी खरीद लेते हैं 18 नवंबर को पुणे जाएंगे मालिक बोले तनखा बढ़ा देंगे विजय 20 –22 हजार मिलने लगेगा. प्रदीप अपने पिता से बोल कर गया था इस बार जो कमाने जाएंगे तो इतना पैसा जरूर कमा लेंगे कि अपना घर बन जाएगा बीच में नहीं बुलाएगा .
सब कुछ धरा का धरा रह गया एक बार घर बनाने को सोचे थे तो बड़े बेटे का अचानक तबियत खराब हो गया जिसमें लाखों रुपए खर्च हुए दोबारा जब घर बनाने को सोचे तो मेरा लाडला ही मुझसे दूर चला गया .प्रदीप मौत का ग्रास बन गया. शिव शंकर झा करते हैं की मेरे पुत्र का किसी से दुश्मनी नहीं था दूसरे को मोटरसाइकिल से मदद करने के चक्कर में मेरे बेटे की जान चली गई भला कोई इस कदर मेरे बच्चे को इतनी बेरहमी से क्यों मारेगा समझ में नहीं आता. हम तो गरीब और सामर्थ्य हीन आदमी हैं न तो हम केस लड़ सकते हैं न ही हमारे पास धन है. हमारे बेटे का कोई सबूत नहीं मिला है जिससे यह पता चले कि मेरा बेटा मर गया आज बड़ा बेटा प्रदीप को खोजने नाव से गया है. आ जाएगा मेरा लाडला यह कहते हुए वृद्ध पिता फफक पड़े.आंखों से आंसू झरझरा कर बहने लगे.

