गडकरी ने बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में स्थित जलमल संयंत्र परियोजनाओं की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। केंद्रीय मंत्री ने इसकी जानकारी देते हुए कहा कि बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल में गंगा सफ़ाई के कार्य की समीक्षा की गई। इन राज्यों में गंगा में आने वाले दूषित जल की कितनी रोकथाम हो पाई, इस संबंध में अधिकारियों से जानकारी ली गई। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के अधिकारियों और ठेकेदारों को निर्देश दिया कि इन परियोजनाओं को जल्द पूरा किया जाए।
मंत्रालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, बिहार के दस शहरों में 20 जलमल परियोजनाएं मंजूर की गई है जिसमें से 11 पटना में हैं, जबकि एक-एक बक्सर, बाढ़, मोकामा, नवगछिया, सुल्तानगंज, हाजीपुर, बेगुसराय, मुंगेर और भागलपुर में है। राज्य में साल 2035 तक 606 एमएलडी जलमल उत्पन्न होने का अनुमान व्यक्त किया गया है जबकि वर्तमाल जलमल शोधन क्षमता 124 एमएलडी है। राज्य में मंजूर परियोजनाओं से 538 एमएलडी जलमल शोधन क्षमता का इजाफा होगा। 216 एमएलडी क्षमता की परियोजनाओं का काम जारी है जबकि 322 एमएलडी क्षमता की परियोजनाएं निविदा के विभिन्न चरणों में है।

जल संसाधन मंत्रालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, झारखंड में साहिबगंज और राजमहल में दो जलमल शोधन परियोजनाएं मंजूरी की गई हैं। राज्य में साल 2035 तक 16 एमएनडी जलमल उत्पन्न होने का अनुमान व्यक्त किया गया है। साहिबगंज में 12 एमएलडी क्षमता की परियोजना है जबकि राजमहल में 3.5 एमएलडी क्षमता की परियोजना निविदा की प्रक्रिया में है।

बैठक के दौरान गंगा नदी के तट पर स्थित 39 घाटों एवं शवदाहगृहों के निर्माण कार्य की भी समीक्षा की गई और गडकरी ने अधिकारियों ने इन सभी परियोजनाओं को अक्तूबर 2018 तक पूरा करने को कहा। बैठक के दौरान बिहार में 37 प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयों और पश्चिम बंगाल में 41 औद्योगिक इकाइयों की भी समीक्षा की गई। यह पाया गया कि इन दोनों राज्यों में 40 औद्योगिक इकाइयों ने मानदंडों को पूरा किया जबकि 9 इकाइयां बंद कर दी गई हैं।


