हार लोक सेवा आयोग ने बुधवार रात को 66 वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा का परिणाम जारी कर दिया। कुल 685 अभ्यर्थी सफल हुए। इस बार वैशाली के सुधीर कुमार टॉपर बने। चौथी रैंक हासिल करने वाले अंकित कुमार की मां आंगनबाड़ी सेविका हैं। तो वहीं 10वीं रैंक वाले आदर्श 9 साल एयरफोर्स में नौकरी कर चुके हैं।
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आइए जानते हैं टॉप टेन में आने वाले के बारे में
बोले- पढ़ाई का कोई शॉर्ट कट नहीं होता
सेंट जोंस स्कूल महुआ से 10वीं तक की पढ़ाई पूरी करने वाले सुधीर कुमार सिविल इंजीनियर हैं। आईआईटी कानपुर में इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद दिल्ली में सेल्फ स्टडी किया। उन्होंने कहा कि पढ़ाई का कोई शॉर्ट कट नहीं होता, इसलिए गाइड के बजाए एनसीईआरटी और स्टैंडर्ड बुक्स पर ही फोकस रहना चाहिए, तभी कामयाबी मिलेगी। पहले ही प्रयास में बीपीएससी टॉपर बने सुधीर के पिता महुआ पोस्ट ऑफिस में कैशियर हैं और मां गृहिणी हैं।


दूसरी रैंक: अंकित कुमार
पिता किसान हैं…बचपन गांव में ही बीता
अंकित कुमार नालंदा के अस्थावां प्रखंड के अकबरपुर गांव के रहने वालों हैं। अंकित के पिता उदय शंकर सिंह किसान हैं। अंकित का बचपन गांव में ही बीता है और प्रारंभिक परीक्षा नालंदा में संपन्न हुई है। इसके बाद दसवीं की परीक्षा राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूल बेंगलुरु में रहते हुए पास की। IIT गुवाहाटी से ग्रेजुएशन किया। इसके बाद सिविल सेवा की तैयारी के लिए दिल्ली चले गए।
तीसरी रैंक: ब्रजेश झा
BPSC में तीसरा रैंक पाने वाले ब्रजेश झा अररिया के रानीगंज ब्लॉक स्थित परमानंदपुर के रहने वाले हैं। ब्रजेश के पिता मणीन्द्रनाथ झा का कई साल पहले निधन हो गया था। इसके बाद मां सुलोचना झा ने ब्रजेश को पढ़ाया। ब्रजेश ने 12वीं तक की पढ़ाई अररिया से की। इसके बाद पटना NIT से बीटेक की डिग्री ली। मुम्बई, पुणे, दिल्ली जैसे जगहों पर प्राइवेट कंपनी में काम किया। इसके बाद नौकरी छोड़ दी और पटना में BPSC की तैयारी करने लगे। उनकी मां ने बताया कि ब्रजेश ने कोई कोचिंग नहीं ली, बल्कि सेल्फ स्टडी पर यह परिणाम प्राप्त किया है।

चौथी रैंक : अंकित कुमार सिन्हा
मां आंगनबाड़ी सेविका…6 साल तक सोशल मीडिया से बनाई दूरी
मदनपुर प्रखंड के सलैया गांव का रहने वाला हैं। यूपीएससी 197 वां रैंक है। आंगनबाड़ी सेविका मीना देवी का बेटा है। पिता छोटे व्यवसाई हैं। अंकित का कहना है कि लगातार प्रयास से सफलता हाथ लगती है। मैं छह साल तक फेसबुक और सोशल मीडिया से दूर रहा, ताकि ध्यान नहीं भटके। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले सोशल मीडिया से दूर रहें।
पांचवीं रैंक :सिद्धांत कुमार
बोले- लक्ष्य पर फोकस रखें
पटना के सिद्धांत कुमार ने 2017 केरला के कोचिंग यूनिवर्सिटी साइंस टेक्नोलॉजी से बीटेक किया । पहली बार में बीपीएससी निकाले हैं। इंटर तक पटना के राजवंशी नगर डीएवी से पढ़ाई किया हूं। इंटर में 91 फीसदी है। मैट्रिक में टेन सीजीपीए आया है। पटना स्थित कंकड़बाग चित्रगुप्त नगर में रहते है। पीता श्यामनदंन सिंह और माता रंजू सिंह है। पिलछे 30 सालों से पीता कंकड़बाग में हार्डवेयर का दुकान हैं।

छठी रैंक: मोनिका श्रीवास्तव
चेन्नई में 35 लाख का था पैकेज
औरंगाबाद की रहने वाली मोनिका श्रीवास्तव सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। 2010 में डीएवी स्कूल से 10वीं में जिला टॉपर रही। कोटा से आईआईटी की तैयारी की। गुवाहाटी आईआईटी से सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग करने के बाद चेन्नई में 35 लाख के पैकेज पर जॉब कर रही है। लॉकडाउन में लौटी मोनिका के पिता बीके श्रीवास्तव ग्रामीण कार्य विभाग में सहायक अभियंता हैं। मां मोनिका श्रीवास्तव प्राइमरी स्कूल की हेडमास्टर है। एक भाई और दो बहन एमबीबीएस डॉक्टर है।

सातवीं रैक :विनय कुमार
IIT दिल्ली से सॉफ्टवेयर इंजीनियर की
विनय कुमार रंजन पार्वती देवी उच्च विद्यालय जमालपुर से वर्ष 2000 में मैट्रिक परीक्षा पास किया। 71 फीसदी नंबर लाकर स्कूल टॉपर बने। इसके बाद आरडीएम डीजे कॉलेज मुंगेर से इंटर किया। इसके साथ आईआईटी की तैयारी शुरू कर दी। आईआईटी दिल्ली से सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनने के बाद पटना और गोरखपुर में कोचिंग खोल दिया। वर्तमान समय में पटना के बैरिया में टारगेट 20-20 कोचिंग चलाते हैं।
आठवीं रैंक: सदानंद
तैयारी करने वाले लोगों को सेल्फ स्टडी करने की जरूरत
पूर्वी चंपारण के सदानंद आईआईटी गुवाहाटी से सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। डिग्री मिलते ही यूपीएससी की तैयारी में जुट गए। आईआईटी की तैयारी करने वाले छात्रों को पूर्णिया में पढ़ाया। खुद 6 से 8 घंटे पढ़ाई की। उन्होंने कहा कि तैयारी करने वाले लोगों को सेल्फ स्टडी करने की जरूरत है। उन्होंने महादेव सहाय हाई स्कूल चिरैया से मैट्रिक और इंटर की पढ़ाई की। 2010 में बिहार बोर्ड से मैट्रिक में 64% मिला। पत्नी एमबीबीएस कर रही है। उन्होंने कहा कि पिता कमल साह किसान हैं।
नौवीं रैंक: आयुष कृष्णा
अभी लक्ष्य है UPSC
आयुष कृष्णा इंजीनियरिंग कर चुके हैं। बेंगलुरु में बतौर सॉफ्टवेयर इंजीनियर नौकरी कर चुके हैं। इस सफलता से खुश हैं, पर अभी लक्ष्य है यूपीएससी। वैसे यूपीएससी का सितंबर में मेंस देना है, उसकी तैयारी में अभी लगे हैं दिल्ली में रहकर। मुजफ्फरपुर के रहने वाले आयुष के पिता डॉक्टर हैं और पढ़ाई में हमेशा मदद करते हैं। इन्होंने रामकृष्ण मिशन देवघर से 12 वीं तक की पढ़ाई की है। कहा कि 2018 नवंबर से तैयारी कर रहा हूं।

10वीं रैंक: अमर्त्य आदर्श
साधारण परिवार से आते हैं
अरवल जिले के कुर्था के रहने वाले अमर्त्य आदर्श साधारण परिवार से आते हैं। इनके पिता उमेश ठाकुर कुर्था बाजार में ही निजी शिक्षण संस्थान चलाते हैं। इनकी स्कूलिंग कुर्था के सरकारी स्कूल से हुई और नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी से इतिहास से ग्रेजुएशन किया। उसके बाद वायुसेना में चयन हो गया। 9 साल 6 महीने तक ये वायु सेना में अपनी सेवा दी। फिर बिहार वित्त सेवा में चयनित हुए। फिर 2016 में तैयारी के सिलसिले में दिल्ली चले गए वहीं सेल्फ स्टडी की।
