चन्दन कुमार चौधरी : खरीक के ध्रुवगंज का पुरानी दुर्गा मंदिर क्षेत्र के अतिप्राचीन सिद्ध शक्ति मंदिरों में से एक है. भक्तों की मुरादें होती है पूरी ध्रुबगंज पुरानी दुर्गा मंदिर में जो भक्त सच्चे मन से माता की आराधना करते हैं उसकी मुरादें पूरी होती है. सिंघासन के साथ गंगा से उत्प्न्न हुई थी माता ऐसी किवदंती है की सैकडों साल पूर्व गांव के शिताबी शर्मा गंगा स्नान करने गांव के बगल नदी में गया था लेकिन लौट कर नही आया.


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ग्रामीणों ने शिताबी का खोज बीन किया लेकिन पता नही चला. ग्रामीणों ने मृत समझकर उसका अंतिम श्राद्ध करने गैंग तट गया तभी शितवी माता का सिंघासन मस्तक पर लेकर नदी से बाहर निकला गांव वालो ने गाजे बजे के साथ माता को स्थापित किया. आज भी माता का सिंघासन शिताबि के बंशज के घर स्थापित है. मंदिर में बलि प्रथा का आयोजन होता है. पूजा में चूक होने पर रूठ गयी थी माता शिताबी शर्मा के बंशज कारे शर्मा ने बताया कि शरु में माता को घर में ही स्थापित किया गया था.

ऐसा कहा  जाता है की पूजन विधि विधान में थोड़ी सी चूक हो जाने पर माता रूठ कर अदृश्य शक्ति से स्थापित जगह से हट कर दूर सहजन पेड़ के नीचे स्थापित हो गयी थी. मनाने पर भी माता का सिंघासन नदी से निकली प्रतिमा कलश सैकडों कोगों के उठाने से भी नही उठता था. मनाने पर माता पुनः स्थापित हुई. उसी समय से शिताबी के बंशजों द्वारा आज भी माता को अपने घर में स्थान देकर नियम निष्ठा से पूजा अर्चना करते हैं. मंदिर में प्रतिमा स्थापित कर विधि विधान के साथ पूजा किया जाता है.

By न्यूज़ डेस्क

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