जिस तरह से उत्तरप्रदेश में प्रचंड बहुमत के बाद योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री पद दिया गया उससे तो यही लगता है कि बीजेपी अब हिंदुत्व और राष्ट्रीयता को लेकर जो नेता ज्यादा प्रखर है उन्हें कमान दिया जा रहा है. तो क्या बीजेपी बिहार के अगले चुनाव में इसी आधार पर गिरिराज सिंह के नाम पर विचार कर सकती है? चुकीं गिरिराज सिंह कई बार सांसद रह चुके है उनकीं भी छवी हिंदुत्व की रही है. राष्ट्रीयता और हिंदुत्व को लेकर बराबर बयान देकर सुर्खियों में बने रहते है.

गिरिराज सिंह योगी की तरह निडर और पार्टी लाइन से हट कर बयान देते रहते है. उनके इस अंदाज को बीजेपी के समर्थक पसंद भी करते है. बीजेपी कार्यकर्ताओं ने तो पिछले बिहार विधानसभा चुनाव में भी गिरिराज सिंह को मुख्यमंत्री का चेहरा बनाने की मांग की थी लेकिन शायद यह बीजेपी आलाकमान को उस समय पसंद नहीं था.

लेकिन अब गिरिराज सिंह को मुख्यमंत्री बनाने को लेकर मांग तेज हो सकती है क्योंकि विपक्ष के अलावा बीजेपी समर्थक भी उन्हें कट्टर हिन्दू के बताते है और बिहार की एक बड़ी जाती भूमिहार का प्रतिनिधित्व भी करते है. मोदी को खुले तौर पर सपोर्ट भी करते रहे है. अप्रैल 2016 में उन्होंने बढ़ती जनसंख्या को नियंत्रित करने के लिए कहा था कि सभी धर्मों के लोगों को एक सामान बच्चा पैदा करना चाहिए. इसके बाद अक्टूबर में कहा कि हिंदूयों से ज्यादा बच्चे पैदा करने का रिक्वेस्ट किया था. फिर नवंबर में कहा कि भारत में हिंदूओं की जनसंख्या को बढ़ाने की जरुरत है.
हालांकि अभी चुनाव में दो साल बचे है पहले देखना होगा योगी किस तरह से यूपी को चला पाते है शायद तभी हिंदुत्व वाली छवी को बीजेपी बिहार की कमान देना चाहेगी. मोदी को 2019 में गद्दी पर बैठाने के लिए बिहार को जितना अहम् होगा लेकिन महागठबंधन से मुकाबला करने के लिए बीजेपी को कुछ बड़े कदम उठाने होंगे…..अब देखना होगा कि इन बड़े फैसलों में गिरिराज और नित्यानंद कौन बाजी मरता है….
लेख़क: आदित्य भूषण

