प्रयोक्ता रेटिंग 3.5/5

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आलोचक रेटिंग 3/5 सिनेमा

प्रकार : Drama

कालावधी : 1 hour 53 minutes

निदेशक : अविनाश दास

कलाकार : स्वरा भास्कर, पकंज त्रिपाठी, संजय मिश्रा

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मुम्बई : इस फिल्म के डायरेक्टर अविनाश दास का नाता मीडिया से रहा है। अविनाश ने बतौर डायरेक्टर अपनी पहली फिल्म मीडिया में कुछ साल पहले सुर्खियां बटोर चुकीं फैजाबाद की डांसर, सिंगर ताराबानो फैजाबादी से प्रेरित होकर बनाई। इस फिल्म की प्लानिंग करीब पांच साल पहले हुई, उस वक्त अनारकली के किरदार में रिचा शर्मा को कास्ट किया गया था। बाद में हालात ऐसे बने फिल्म शूटिंग फ्लोर तक ही नहीं पहुंच पाई। करीब चार साल बाद अविनाश ने इस प्रॉजेक्ट पर फिर काम शुरू किया और ‘तनु वेड्स मनु’ और ‘रांझना’ में अपनी बेहतरीन ऐक्टिंग से मीडिया की सुर्खियां बटोर चुकीं स्वरा भास्कर को अविनाश ने अपनी इस फिल्म के लिए अप्रोच किया। स्वरा को कहानी और किरदार पंसद आया। इससे पहले स्वरा अपनी सोलो फिल्म ‘नील बटे सन्नाटा’ में खुद को बेहतरीन ऐक्ट्रेस साबित कर चुकी हैं। फिल्म की शूटिंग शुरू करने से पहले स्वरा ने बिहारी भाषा पर जमकर होमवर्क किया। आरा की संस्कृति को ज्यादा नजदीक से जानने के लिए स्वरा किसी नामी होटेल की बजाए आरा के एक छोटे से होटेल में करीब एक महीने रहीं। स्वरा की यही मेहनत अब अनारकली के किरदार में साफ नजर आती है। अंत में स्वरा ने अपनी दमदार ऐक्टिंग के दम पर इस फिल्म को कहीं कमजोर नहीं पड़ने दिया तो वहीं तारीफ करनी होगी स्वरा के डायलॉग डिलीवरी की जो इस फिल्म की यूएसपी है। बतौर डायरेक्टर अविनाश दास की यह डेब्यू फिल्म है, लेकिन अविनाश इस सीमित बजट में बनी फिल्म के माध्यम से कई गंभीर मुद्दों पर भी दर्शकों का ध्यान खींचा है। बेशक फिल्म में कई डबल मीनिंग संवाद हैं, लेकिन ऐसे संवाद अब कॉमिडी शो और फिल्मों में अक्सर सुनाई देते हैं। इस फिल्म को लेकर सेंसर का रवैया कुछ ज्यादा ही सख्त रहा। कमिटी ने इस फिल्म को ‘ए’ सर्टिफिकेट तो दिया ही साथ ही कई सीन पर कैंची भी चलाई।

कहानी : बिहार के आरा जिले में एक छोटे से मोहल्ले में रहने वाली लोक गायिका और डांसर अनारकली (स्वरा भास्कर) ने बचपन से ही अपनी मां को स्टेज पर गाते और डांस करते देखा। स्टेज पर मैरिज फंक्शन के दौरान एक हादसे में अनाकली की मां मारी जाती है। अनार जब बड़ी होती है तो रंगीला (पकंज त्रिपाठी) के ऑर्केस्ट्रा ग्रुप में शामिल हो जाती है। अनारकली इस ग्रुप की नंबर वन टॉप सिंगर, डांसर है। रंगीला के ग्रुप के साथ अनारकली स्टेज पर जब ठुमके लगाते परफॉर्म करती है तो स्टेज पर नोटों की बारिश सी हो जाती है। इसी बीच एक दिन पुलिस थाने में हो रहे फंक्शन के दौरान यहां चीफ गेस्ट बनकर पहुंचे आरा के एक विश्वविधालय के वीसी और स्टेट के चीफ मिनिस्टर के खास माने जानेवाले धर्मेन्द्र चौहान (संजय मिश्रा) का दिल अनारकली पर आ जाता है। चौहान स्टेज पर पब्लिक के सामने ही अनारकली के साथ अश्लील हरकतें शुरू कर देते हैं। थाना परिसर में हो रहे इस फंक्शन में चौहान की अश्लील हरकतें जब हद से ज्यादा बढ़ जाती हैं तो अनार उसे सबके सामने एक तमाचा लगाती है। इस थाने का एसएचओ बुलबुल पांडे (विजय कुमार) चौहान का खास है, स्टेज पर पब्लिक के बीच एक नाचने वाली से तमाचा खाने के बाद चौहान अब किसी भी कीमत पर अनारकली को हासिल करना चाहता है। ऐसे हालात में अनारकली एक दिन चौहान और लोकल पुलिस से बचकर दिल्ली आ जाती है।

ऐक्टिंग : बॉलिवुड मसाला फिल्मों में अपनी जबर्दस्त कॉमिडी से फैन्स का दिल जीतने वाले संजय मिश्रा इस फिल्म के विलन हैं। वीसी चौहान के किरदार को संजय मिश्रा ने इस बेहतरीन ढंग से निभाया है कि हॉल में बैठे दर्शक उनके किरदार से नफरत करने लगते हैं। वहीं रंगीला ऑर्केस्ट्रा पार्टी के हेड के किरदार में पंकज मिश्रा ने अपने किरदार को दमदार बनाने के लिए अच्छी मेहनत की है। फिल्म की लीड ऐक्ट्रेस स्वरा भास्कर की बेहतरीन परफेक्ट ऐक्टिंग इस फिल्म की सबसे बडी यूएसपी है।

निर्देशन : अविनाश ने एक सरल सब्जेक्ट पर ऐसी फिल्म बनाई है जो ग्राउंड लेवल की सच्चाई को दर्शाती है। ऐसा लगता है कि अविनाश ने जैसे एक खास दर्शक वर्ग की पंसद को ध्यान में रखकर इस प्रॉजेक्ट पर काम किया, इसकी एक वजह यह भी हो सकती है कि फिल्म की कहानी कुछ ज्यादा ही टिपिकल है। फिल्म की भाषा ईस्ट यूपी और बिहार का मिक्सचर है। यकीनन फिल्म की यह भाषा इन राज्यों में तो बॉक्स ऑफिस के नजरिए से परफेक्ट हो, लेकिन हो सकता है कि ‘ए’ क्लास सेंटरों और टॉप मल्टिप्लेक्स ऑडियंस को यह भाषा पूरी तरह समझ न आए।

संगीत : इस फिल्म के सभी गाने सब्जेक्ट, माहौल के डिमांड पर बनाए गए हैं। इन गानों के बोल आम बॉलिवुड फिल्मों में नजर आने वाले गानों जैसे नहीं हैं। हो सकता है कि जेन एक्स को फिल्म के यह टिपिकल स्टाइल के गाने शायद पसंद न आएं।

क्यों देखें : अगर आप स्वरा के फैन हैं तो इस फिल्म को मिस न करें। इंटरवल से पहले फिल्म की सुस्त रफ्तार सब्र का इम्तिहान लेती है। वहीं फिल्म का क्लाइमैक्स गजब है। अगर आप मुंबइया चालू मसाला फिल्मों से उब चुके हैं तो ‘अनारकली’ एक बार देखी जा सकती है।

By न्यूज़ डेस्क

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