जिस तरह सांता क्लाज क्रिसमस के अवसर पर गिफ्ट बांटकर बच्चों के चेहरे पर मुस्कान बिखेरते हैं उसी तरह शहर में एक ऐसे चिकित्सक भी हैं जो गरीब और जरूरतमंद लोगों का कम पैसे में न सिर्फ इलाज करते हैं बल्कि हरसंभव मदद भी करते हैं। जी हां, हम बात कर रहे हैं इशाकचक मोहल्ले में रहने वाले 62 वर्षीय डॉ. अवधेश कुमार झा की।
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गांधी जी के नाम से प्रसिद्ध डॉ. झा पिछले 30 वर्षों से गरीब मरीजों की सेवा कर रहे हैं। शहर में एमबीबीएस चिकित्सकों की फीस जहां कम से कम दो सौ रुपये से लेकर एक हजार रुपये है वहीं डॉ. झा मरीजों से फीस के रूप में केवल पांच रुपये लेते हैं। कई मरीजों से तो वह भी फीस नहीं लेते हैं।
डॉ. झा ने बताया कि उनके पास एमबीबीएस की डिग्री नहीं है, वह आरएमपी हैं। डॉ. हरिनारायण सिंह अभी बेगूसराय में सिविल सर्जन हैं। उनके साथ 10 वर्ष रहकर डॉ. झा ने बीमारियों के बारे में जानकारी ली और मरीजों का इलाज करने लगे। वे पिछले 30 वर्षों से मरीजों का इलाज कर रहे हैं। वह प्रतिदिन तकरीबन एक सौ मरीजों का इलाज करते हैं। उनके पुत्र सुमन भी पिता का हाथ बंटाते हैं, वह भी इसी पेशे में योगदान देना चाहते हैं।

शनिवार की रात उनके क्लीनिक में मरीजों की भीड़ लगी हुई थी। देखने से ही मरीज निर्धन लग रहे थे। डॉ. झा ने बताया कि उन्हें ईमानदारी की रोटी भाती है। 1986 से 1988 तक उन्होंने वकालत की लेकिन उन्हें वह पेशा इसलिए पसंद नहीं आया क्योंकि उसमें ईमानदारी से कुछ भी नहीं होने वाला था। इसलिए उन्होंने वकालत छोड़ दी।
उन्होंने बताया कि श्यामा नारायण लाहिड़ी से उन्होंने दीक्षा ली है। उनके ईस्ट गुरु हैं। उनके सानिध्य की वजह से ही डॉ. झा को गरीबों की सेवा करने की प्रेरणा मिली। उन्होंने ही यह सिखाया कि सेवा ही धर्म है। डॉ. झा के पास एमआर भी आते हैं, अपनी कंपनी की दवा के प्रचार करने के लिए। उनसे जो नमूने के तौर पर दवाएं मिलती हैं, उसे वे निर्धन मरीजों को दे देते हैं।

