
नवगछिया: माता का दरवार सजधज के तैयार हुआ माता के आगमन के लिए सारी तयारी पूरी कर ली गई है कहते है कि तेरहवीं से अट्ठारहवीं शती की अवधि में इस कथा पर आधारिक बहुत सी रचनाएं की गयीं। इन कृतियों का धार्मिक उद्देश्य मनसा देवी की महत्ता का प्रतिपादन करना था किन्तु ये कृतियाँ बेहुला एवं एवं उनके पति बाला लखन्दर के पवित्र प्रेम के लिये अधिक जाने जाते हैं। यह बिहुला-बिषहरी की कथा प्राचीन भारत के षोडश जनपदों मे से एक अंगदेश (वर्तमान बिहार के भागलपुर और नवगछिया ,मुंगेर जिलों के आसपास का क्षेत्र) की राजधानी चंपा (वर्तमान मे भागलपुर जिले के नाथनगर के चंपानगर) की है। महाभारत के समय यहाँ के राजा कर्ण हुआ करते थे ऐसा माना जाता है यह सर्वप्रिय कथा के रूप में स्थापित है और अब यह नारी मात्र के उत्सर्ग के अभूतपूर्व प्रतिमान के उद्धरण की कथा के रूप में स्थापित है। क्योंकि कहानी के अनुसार अपनी कठोर तपस्या से सती बेहुला ने अपने पति को जीवित कर दिखाया था।

