नवगछिया बाजार स्थित दुकान में काम कर बेटे को पढ़ाने वाले अजय कुमार की मेहनत रंग लाई। पुत्र मनीष जायसवाल ने जिले का टॉपर बनकर मां और पिता का नाम रोशन किया है। बिहार बोर्ड की मैट्रिक की परीक्षा में जिले में अव्वल मनीष आईआईटी कर आनंद कुमार की तरह सुपर 30 खोलकर गरीब मेधावी बच्चों को पढ़ाना चाहता है। आर्थिक तंगी के बीच पढ़ाई करने वाले मनीष का कहना है कि पैसे के अभाव में मेधा दम नहीं तोड़े, इसीलिए वह मेधावी बाच्चों को मुफ्त में पढ़ाना चाहते हैं। मनीष ने कहा कि पापा बचपन से ही पढ़ाई के प्रति हमें प्रोत्साहन देते थे। वे खुद घंटों बैठकर हमें पढ़ाते थे। मेरी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। इससे काफी परेशानी होती थी।
फिजिक्स से स्नातक अजय और आठवी पास नीतू देवी के पुत्र मनीष ने कहा कि वह आईआईटी करना चाहता है, लेकिन गरीबी के कारण उसके पिता की स्थिति उसे पढ़ाने की नहीं है। वह आनंद के सुपर 30 में पढ़ना चाहता है। अगर सुपर 30 में उसे पढ़ने अवसर मिल जाता है तो उसका भविष्य बन जाएगा। उसके पिता ने कहा कि शुरू से उसकी इच्छा थी कि उसका बेटा रिसर्च स्कॉलर बने। मनीष बचपन से ही अनुशासन में रहता था। वह पढ़ने के समय पढ़ता था और खेलने के समय खेलता था।

कठिन और हल्के के चक्कर में नहीं रहता था। गणित के सवालों को वह किसी प्रकार से हल करता था। वहीं मा नीतू देवी बेटे की कामयाबी से खुश हैं। उन्होंने कहा कि उसकी इच्छा थी कि बेटा इंजीनियर बने या बैंक में काम करे। वह अच्छा इंसान बने। मनीष की कामयाबी पर घर में दादा गिरिजा नंदन भगत और दादी प्रमिला देवी मिठाई बांट रही थी। घर में खुशी का माहौल था, लेकिन पिता को बेटे के आगे की पढाई की चिंता थी। मनीष ने कहा कि जो सवाल नहीं बने उसे खुद बनाने का प्रयास करना चाहिए। सेल्फ स्टडी छह घंटे करना चाहिए। मैं कठिन सवालों को कई तरीके से उल्टा-पुल्टा कर बनाता था। इस कारण गणित मेरा अच्छा विषय बन गया था।

नवगछिया दियारा की माटी में है प्रातिभा की खुशबू
गंगा-कोसी के बीच भौगोलिक दृष्टिकोण से अतिदुर्गम दियारा कहे जाने वाले नवगछिया के नौनिहालों ने शिक्षा के क्षेत्र में लगातार परचम लहराकर यह साबित कर दिया है कि दियारा की माटी में भी प्रतिभा की खुशबू है। बस जरूरत है उसे निखारने, संवारने और तरासने की। आये दिन गोलियों की तड़तड़ाहट के बीच जम्हाई लेकर उठने वाले अपराध की जमी के नाम से मशहूर नवगछिया में जन्म लेने वाले नौनिहालों ने अपनी मेधा का परचम लहराकर यह साबित कर दिया है कि उसके अंदर प्रातिभा कूट-कूटकर भरी पड़ी है। बिहार बोर्ड की परीक्षा में अव्वल आए चारों छात्र नवगछिया के ही हैं। मनीष जयसवाल ने जिले में प्रथम, पूजा भारती ने द्वितीय, सुशांत सिद्धार्थ ने तृतीय और प्रियंका कुमारी ने चतुर्थ स्थान प्राप्त कर दियारा का मान बढ़ाया है।

इसके पूर्व सीबीएसई की परीक्षा में भी जिले में नवगछिया के सात छात्र और छात्राओं ने अव्वल स्थान प्राप्त कर हलचल मचा दी थी। सौरभ कुमार ने जिले में टॉप किया था। वहीं सृष्ठि चिरानिया ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया था। शिवम, माधव, नेहा, मानवी और जया केडिया ने भी जिला में स्थान लाया था। दियारा कहे जाने वाले नवगछिया की मिट्टी में मेधा कूट-कूट कर भरी हुई है। अपराधियों की शरणस्थली के लिए बदनाम नवगछिया में प्रतिभाएं भरी पड़ी हैं। जरूरत है उसे तराशने की।

पूजा ने सोनवर्षा व प्रियंका ने झंडापुर का नाम जिले में किया रोशन
पूजा व प्रियंका ने जिले में हासिल किया दूसरा व चौथा स्थान
दोनों के घर बधाई देनेवालों का तांता, दोनों बनना चाहती हैं डॉक्टर
बिहपुर दक्षिण पंचायत अंतर्गत सोनवर्षा निवासी निरंजन कुमार की तीसरी बेटी पूजा कुमारी ने मैट्रिक की परीक्षा में जिले में दूसरा स्थान लाकर अपने गांव का नाम रोशन किया है। उसकी इस उपलब्धि से गांव में हर्ष का महौल है। पूजा गांव के कन्या उच्च विद्यालय सोनवर्षा की छात्रा है। पूजा चार बहनों व एक भाई में तीसरे नंबर पर है। पूजा की बड़ी बहन प्रिया भारती टीएमबीयू भागलपुर में एमएससी कर रही है। दूसरी बहन मीसा भारती पटना से बीटेक कर रही है। पायल कृति 10वीं की छात्रा है। वहीं भाई आनंद भरद्वाज बायोटेक कर रहा है। वहीं पूजा ने बताया कि हम आगे नीट पास कर मेडिकल के क्षेत्र में जाना चाहते हैं। पूजा ने सफलता का श्रेय अपनी माता रेणु देवी, पिता निरंजन कुमार, तीनों बहन व शिक्षक बबलू कुमार, रामकिशोर चौधरी व संजीव झा को दिया है।

उधर, झंडापुर स्थित स्व विजय सिंह के घर भी लोग पहुंचकर बधाई दे रहे थे। उनकी बेटी प्रियंका ने जिले में मैट्रिक की परीक्षा में चौथा स्थान हासिल कर यह बता दिया कि सच्चे मन से अगर मेहनत किया जाय तो सफलता दूर नहीं रहेगी। प्रियंका गांव के नकछेदी कुंवर उच्च विद्यालय की छात्रा है। उनके पिता का निधन 2010 में हो गया था। प्रियंका चार भाई बहन में सबसे बड़ी है। प्रियंका आगे चलकर मेडिकल के क्षेत्र में जाना चाहती है। वहीं प्रियंका ने बताया अच्छी पढ़ाई के करने के लिए शहरी महौल का होना जरूरी नहीं है। ग्रामीण परिवेश में रहकर भी सफलता हासिल की जा सकता है। प्रियंका ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपनी माता रीना देवी समेत अपने शिक्षकों को दिया।


