नवगछिया रेलवे स्टेशन को मॉडल रेलवे स्टेशन कहा जाता है. रेलवे के अनुसार बी ग्रेड के इस स्टेंशन का नाम मॉडल तो कर दिया गया
लेकिन सुविधाओं का माडलीकरण अब तक नहीं किया गया. इस कारण नवगछिया स्टेशन पर लोग कई तरह की अवुसविधाओं के बीच अपनी यात्रा की शुरूआत करते हैं. नवगछिया स्टेशन पर प्लेटफार्म नंबर एक का शेड जीर्ण शीर्ण है तो दो पर शेड ही नहीं है. स्टेशन पर पेय जल की उत्तम व्यवस्था नहीं है तो स्टेशन तक आने वाले संपर्क पथों की हालत जर्जर है.

नवगछिया रेलवे स्टेंशन : असुविधाओं के बीच यात्रा करतें हैं यात्री

1. मानसून में भींग कर और चिलचिलाती धूप में यात्रा की शुरूआत करना मजबूरी, क्योंकि प्लेटफार्म नंबर एक का शेड से मानसून में पानी टपकता है तो दो नंबर प्लेटफार्म पर शेड ही नहीं है.
2. स्टेशन मॉडलीकरण के तहत प्लेट फार्म नंबर दो के लिए करोड़ों की लागत से बनाये गये भवन में सिर्फ चल रहा है शौचालय, यहां बनाये गये टिकट काउंटर खुलते नहीं हैं. पूरा भवन साबित हुए सिर्फ हाथी का दांत.
3. नवगछिया बस स्टैंड से एसपी कोठी होते हुए आने वाला संपर्क पथ गड्ढे में तब्दील, तो नवगछिया राजमार्ग से नया टोला होते हुए प्लेटफार्म नंबर दो पर आने वाले संपर्क पथ जर्जर, दोनों रास्तों में अक्सर हो रही हैं हादसे. लंबे समय से लोग कर रहे हैं संपर्क पथ निर्माण करने की मांग.

4. पूर्वी केबिन के पास तीन साल से बन रहा है ओवरब्रीज, अब तक आधा अधूरा, लोगों को होती है परेशानी, जाम लगने के कारण लोगों की ट्रेंने छूट जाती हैं.
5. अधिकारी आते ही स्टेशन परिसर हो जाता है अतिक्रमण मुक्त लेकिन अधिकारी के जाते ही पुन: स्टेशन परिसर में सज जाती हैं अवैध दुकानें, ऐसे दुकानों पर अक्सर पाकेटमारों व असामाजिक तत्वों का जमवाड़ा लगा रहता है.
6. नवगछिया मालगोदाम से पार्सल कार्यालय दूर रहने से व्यवसायियों को हो रही है तरह तरह की परेशानी, स्टेशन परिसर में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था नहीं.

लंबे समय से लोग कर रहे हैं मांग

नवगछिया शहर आने और यहां से बाहर निकलने के लिए हर हालत लोगों को रेलवे लाइन को पार करना पड़ता है. नवगछिया शहर आने जाने के लिए महज दो रास्तें एक पूर्वी केबिन हो कर तो दूसरा पश्चिम केबिन होकर, दोनों केबिन के पासरेलवे का समपार फाटक है. हरेक 15 मिनट में समपार फाटक गिर जाता है. ऐसे में दोनों केबिनों के पास हमेशा जाम लगा ही रहता है. शहर स्थानीय लोगों का मानना है इस कारण नवगछिया में विकास की रफ्तार धीमी है.

मालूम हो कि शहर के अनुमंडल अस्पताल से रेफर हो कर निकलने वाले मरीज व अन्य आवश्यक सेवा के वाहन अक्सर पूर्वी या पश्चिम केबिन के पास फंसे रहते हैं. मालूम हो कि नवगछिया बाजार पैदल आने वाले लोग अक्सर रेल की पटरियों को पार कर हर आते हैं और यहां से बाहर निकलते हैं. अक्सर लोग यहां ट्रेन के चपेट में आ जाते हैं. लोगों की मांग है कि नवगछिया मालगोदाम के आस पास से एक आरयूबी का निर्माण करा दिया जाय तो नवगछिया शहर में यातायात की गति निर्बाध होगी और नवगछिया विकास के भी रास्ते पर सरपट दौड़ेगा.

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By Rishav Mishra Krishna

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