बिहार में प्राइवेट स्कूलों में आजकल चल रही मनमानी और बेतहाशा फीस बढ़ाए जाने को लेकर हाईकोर्ट ने नीतीश सरकार से कड़ा रुख अपनाते हुए सवाल पूछा है. पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन की खंडपीठ ने संजीव कुमार की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए नीतीश सरकार से पूछा है कि अन्य राज्यों की तरह बिहार में प्राइवेट स्कूलों के लिए कोई रेगुलेटरी बॉडी क्यों नही है?
बता दें कि संजीव कुमार के तरफ से हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर बताया गया था कि बिहार में प्राइवेट स्कूल मनमाने ढंग से हर साल अपनी फीस बढ़ाते हैं जिसका सीधा प्रभाव अभिभावकों पर पड़ता है. और कई बच्चे मनमाने ढंग से फीस बढोतरी के कारण पढाई से वंचित रह जाते हैं.
इस याचिका पर कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि राजस्थान, तमिलनाडू और अन्य राज्यों में इस तरह की फीस बढोत्तरी पर निगरानी के लिए रेगुलेटरी बॉडी है पर बिहार में ऐसा कुछ भी नही है. इस मामले में हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव को तलब किया है और छह सप्ताह बाद इस मामले में फिर से सुनवाई की जाएगी.



