अब तक दर्ज नहीं की जा सकी है मामले की प्राथमिकी

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नवगछिया : असम के कमरुख जिले के गोवाहाटी झालूबारी थाने के बीबीसी कॉलोनी निवासी रेलकर्मी धर्म वासफोरे का कोई अता पता पुलिस नहीं पायी है तो दूसरी तरफ कल तक मामले से पूरी तरह से पल्ला झाड़ रहे जीआरपी के थानेदार अनि भोला महतो ने शुक्रवार को पत्रकारों को जानकारी देते हुए कहा कि 28 दिसंबर की रात को उन्होंने धर्म वासफोरे को गरीबरथ पर बैठा कर कटिहार के लिए रवाना किया था. पुलिस ने यह भी दावा किया है कि धरमा मानसिक रुप से मंदबुद्धि भी था. उसके परिजन भी इसे स्वीकार कर चुके हैं. अब वह गरीब रथ से कहां गया इस बात की जिम्मेदारी उनकी नहीं है. थानाध्यक्ष ने उक्त खुलासा तब किया है जब धरमा के परिजन जीआरपी का चक्कर लगा लगा कर परेशान हो चुके थे. इसके पीछे भी थानाध्यक्ष का तर्क है कि पहले उन्होंने धरमा का फोटो नहीं देखा था इसलिए अनभिज्ञता जाहिर कर रहे थे. जब फोटो देखा तो उन्हें याद आया कि 28 दिसंबर की रात को उन्होंने उक्त युवक को गरीब नवाज एक्सप्रेस से कटिहार के लिए रवाना किया था.

दर्ज नहीं की गयी है मामले की प्राथमिकी

धर्मवासफोरे के रहस्यमय परिस्थिति में गायब हो जाने के मामले की प्राथमिकी अब तक नवगछिया जीआरपी थाने में दर्ज नहीं की गयी है. जबकि परिजन 29 दिसंबर से ही जीआरपी थाने का चक्कर लगा रहे हैं. धर्म वासफोरे के मामा और फिलहाल कटिहार में रहने वाले रेल कर्मी हीरालाल वासफोरे ने कहा कि वे जगह जगह धरम को ढ़ूंढ़ रहे हैं. लेकिन उन लोगों को धर्म का कोई सुराग नहीं मिला है. हीरालाल ने कहा कि उन्हें आशंका है कि धर्म नवगछिया में ही कसी वारदात का शिकार हो गया है. धरम के मामा ने कहा कि धरम थोरा बुद्धि में कमजोर जरूर था लेकिन वह पागल नहीं था. वह रेलवे में नौकरी करता था. छपरा से आने के क्रम में उसने बरौनी में फोन करके कहा था कि उसके पीछे कुछ गुंडे पड़े हैं. इसके बाद 12.30 बजे नवगछिया से उसने फोन किया कि उसे पुलिस ने पकड़ लिया है. धरम ने अपने मामा को उक्त सिपाही से भी बात कराया था तो सिपाही ने यही कहा था कि उसे गरीब नवाज एक्सप्रेस से कटिहार ले कर आ रहे हैं. हीरालाल ने जानकारी देते हुए कहा कि वे लोग शनिवार को नवगछिया आ रहे हैं और मामले की प्राथमिकी जीआरपी थाने में दर्ज करायेंगे.

कहते हैं रेल एसआरपी

कटिहार के रेल एसआरपी उमाशंकर सिंह ने कहा कि मामला अपहरण का नहीं है. युवक को पुलिस द्वारा गरीब नवाज एक्सप्रेस पर चढ़ा दिया गया था. युवक कहां चला गया इसकी छान बीन की जायेगी.
प्रीतम भट्टाचार्य हत्याकांड से मिलती है धरम के गायब होने की कहानी

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वर्ष 2012 नौ जुलाई को असम के ही सिल्चर निवासी प्रशिक्षु वैज्ञानिक प्रीतम भट्टाचार्य अवध असम एक्सप्रेस से दिल्ली के लिए यात्रा पर था. कुर्सेला व नवगछिया स्टेशन के बीच कुछ संदिग्ध लोगों से प्रीतम की बाता बाती होती है. जैसे ही ट्रेन नवगछिया पहुंचने को होती है एक अपराधी उसका लैपटॉप कवर लेकर भाग जाता है और नवगछिया स्टेशन पर उतर जाता है. प्रीतम भी उक्त अपराधी का पीछा करते हुए नवगछिया स्टेशन पर उतर जाता है. स्टेशन पर उतर कर वह जीआरपी रपट लिखाने जाता है जहां से डांट डपट कर भगा दिया जाता है. लैपटॉप कवर में जरूरी कागजात और एक डिजीटल कैमरा था. इसलिए प्रीतम नवगछिया स्टेशन पर किसी व्यक्ति को अपनी व्यथा सुनाता है तो उसे लैपटॉप कवर व समान दिलाने का भरोसा दिलाया जाता है. इसके बाद क्रमबद्ध तरीके से प्रीतम नवगछिया के एक आपराधिक गिरोह का शिकार हो जाता है. इसके बाद प्रीतम की बरामदगी के लिए दबिश होती है. लापता होने के ठीक छठे दिन प्रीतम का सर से धर अलग लाश कटरिया ओवर ब्रीज के नीचे रेल ट्रेक पर 15 जुलाई को मिलता है. देखा जाय तो धरम वासफोरे के लापता होने की कहानी भी कमोबेश प्रीतम भट्टाचार्य हत्याकांड से मिलती जुलती है

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By Rishav Mishra Krishna

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