नवगछिया। इस वर्ष सावन का पवित्र महीना 30 जुलाई से प्रारंभ होकर 28 अगस्त तक चलेगा। पूरे 30 दिनों के इस सावन मास में भगवान शिव की आराधना के लिए चार सोमवारी व्रत का विशेष संयोग बन रहा है। सावन का समापन श्रावण पूर्णिमा के दिन होगा, जिस दिन रक्षाबंधन का पर्व भी मनाया जाएगा।
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ज्योतिषाचार्यों के अनुसार कई वर्षों बाद ऐसा शुभ संयोग बन रहा है, जिसे धार्मिक दृष्टि से अत्यंत फलदायी माना जा रहा है। पूरे सावन मास में शिवालयों में जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, शिव सहस्रनाम पाठ और विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन होगा। श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि और मंगलकामना की प्रार्थना करेंगे।
ज्योतिषाचार्य पंडित मनोज कुमार मिश्र ने बताया कि भारतीय संस्कृति में व्रत, उपासना और धार्मिक अनुष्ठानों का विशेष महत्व है। सावन सोमवार का व्रत करने से विवाहित महिलाओं को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है, जबकि अविवाहित कन्याओं को योग्य एवं मनचाहा वर मिलने की मान्यता है।

उन्होंने कहा कि सावन मास भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। इस दौरान प्रत्येक सोमवार और प्रदोष व्रत पर शिव पूजा का विशेष महत्व माना गया है। श्रद्धालुओं को नियम, संयम, सात्विक आहार और शुद्ध आचरण के साथ भगवान शिव की आराधना करनी चाहिए।
पंडित मिश्र के अनुसार सावन में शिवलिंग का रुद्राभिषेक, पार्थिव पूजन, लघु रुद्र एवं महारुद्र पाठ, जलाभिषेक तथा बेलपत्र अर्पित करना अत्यंत शुभ माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि इस माह में सच्चे मन से भगवान शिव की पूजा करने से दैहिक, दैविक और भौतिक कष्ट दूर होते हैं तथा जीवन में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
सावन 2026 की चार सोमवारी
- 03 अगस्त – पहली सोमवारी
- 10 अगस्त – दूसरी सोमवारी
- 17 अगस्त – तीसरी सोमवारी
- 24 अगस्त – चौथी सोमवारी
