भागलपुर: जिस विषय में छात्र नहीं हैं या फिर छात्रों की संख्या नहीं के बराबर है, वैसे विषयों की पढ़ाई या तो बंद हो जाएगी या फिर मिलते-जुलते विभागों में विलोपित किया जाएगा। राज्य सरकार ने ऐसी जानकारी तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय से मांगी है। सीसीडीसी डॉ. सुरेन्द्र कुमार सिंह ने बताया कि सरकार मान रही है कि जिन विषयों या कोर्स में छात्र नहीं के बराकर हैं और उनमें शिक्षक नियुक्त हैं, तो ऐसे विभागों के रखरखाव तथा शिक्षकों व कर्मचारियों के वेतन पर खर्च बेमानी है। ऐसे में एक तरह की प्रकृति से मिलते-जुलते विभागों या कोर्स का एक-दूसरे में विलय कर शिक्षकों और कर्मचारियों के गैर जरूरी पदों को समाप्त कर देना चाहिए। उन्होंने बताया कि इस तरह की राय सरकार की पहले भी रही थी और अब फिर सरकार के शिक्षा विभाग ने कार्रवाई का मन बनाया है।

वर्षों पहले बिना आकलन के शुरू किए गए कोर्स और पीजी विभाग अब छात्रों के लिए तरस रहे हैं। जब ये कोर्स शुरू हुए या विभाग खुले थे तब नयापन के कारण इनमें दाखिले की संख्या ठीक-ठाक थी। लेकिन जैसे-जैसे ये कोर्स, विभाग पुराने होते गए, इनकी जरूरत घटती गई और इनमें छात्रों की संख्या उंगली पर गिनने लायक रह गई है। लेकिन अब ऐसे कोर्स और विभागों पर शिक्षा विभाग की नजर पड़ी है। सरकार ऐसे कोर्स और विभागों को बंद करने या इनमें कार्यरत शिक्षकों के पद विलोपित करने पर विचार कर रही है। इस तरह की कार्रवाई स्नातक से लेकर पीजी स्तर पर चल रहे ऐसे कोर्स पर होगी।

हालांकि कुछ ऐसे कोर्स और विषय भी हैं जिनक महत्व पहले से बढ़ गया। पढ़ाई के नए ट्रेंड में कॉमर्स की मांग बढ़ी है। स्नातक और पीजी स्तर पर राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र में भी दाखिले की संख्या बढ़ी है। ऐसे विषयों और कोर्स के लिए शिक्षा विभाग ने कहा है कि और शिक्षक तथा कर्मचारी की नियुक्ति के लिए प्रस्ताव भेजा जाए।

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By न्यूज़ डेस्क

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