भागलपुर विश्वविद्यालय के छात्रों को बीते दस साल से सत्र के पिछड़ने का खामियाजा अब कक्षाओं की बली के रूप में भुगतना पड़ रहा है। इस वर्ष अब तक के छह महीनों में कॉलेजों में बमुश्किल दो महीने ही कक्षाएं चल पाई हैं। एक महीना गर्मी की छुट्टी में बीता। बाकी के तीन महीने कॉलेजों में स्नातक पार्ट टू और पार्ट थ्री की परीक्षा संचालन में चले गए। बात यहीं खत्म नहीं होती है।
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विश्वविद्यालय पर सत्र नियमित करने का इतना दबाव है कि अगले छह महीने में भी चार से पांच महीने परीक्षाओं में ही बीतने वाले हैं। विश्वविद्यालय प्रयास कर रहा है कि 2018 में उसी वर्ष की परीक्षाएं ली जाएं और रिजल्ट दिए जाएं, जिससे अगले वर्ष तक स्नातक का सत्र नियमित हो जाए। इसके लिए देरी से चल रहे सत्रों की परीक्षाएं 2017 में ही ली जाएंगी। सत्र नियमित रहने की स्थिति में स्नातक में एक वर्ष में तीन परीक्षाएं पार्ट वन, टू और थ्री की होती हैं।

लेकिन इस वर्ष विश्वविद्यालय अब तक पार्ट वन, टू और थ्री 2016 की परीक्षाएं ले चुका है और अगले छह महीने में 2017 के पार्ट वन, टू और थ्री की परीक्षाएं लेनी हैं। इसके अलावा 2008 से लेकर 2011-12 तक के वैसे छात्र जो अलग-अलग पार्ट में फेल या प्रोमोट हो गए और उनके पंजीयन की अवधि बीत चुकी है, को भी विश्वविद्यालय एक विशेष परीक्षा देने का मौका देगा ताकि बैकलॉग खत्म हो सके। ऐसे में चार और परीक्षाएं अभी होनी बाकी हैं। जब तक ये परीक्षाएं चलेंगी तब तक कॉलेजों में कक्षाएं नहीं होंगी क्योंकि ज्यादातर परीक्षाएं कॉलेजों में ही होंगी।

