भागलपुर। विक्रमशिला सेतु को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। क्षतिग्रस्त हिस्से की स्थायी मरम्मत के लिए 1 अक्टूबर से सेतु पर आवागमन पूरी तरह बंद किया जाएगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सड़क निर्माण कार्यों की समीक्षा के दौरान बेली ब्रिज हटाकर पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से की स्थायी मरम्मत का काम तेजी से पूरा करने का निर्देश दिया है। जनवरी 2027 तक काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
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फिलहाल बेली ब्रिज के जरिए लोगों को सीमित आवागमन की सुविधा मिल रही है, लेकिन यह अस्थायी व्यवस्था है। गंगा का जलस्तर कम होने के बाद 1 अक्टूबर से बेली ब्रिज हटाने की प्रक्रिया शुरू होगी। इसके साथ ही मुख्य पुल पर भी आवाजाही पूरी तरह बंद रहेगी।
पंजाब और हरियाणा से पहुंचा मरम्मत का सामान
विक्रमशिला सेतु की स्थायी मरम्मत की तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं। मरम्मत में इस्तेमाल होने वाला अधिकांश सामान पंजाब और हरियाणा से भागलपुर पहुंच चुका है। शेष सामग्री भी काम शुरू होने से पहले पहुंचने की उम्मीद है। प्रशासन और निर्माण एजेंसियां गंगा के जलस्तर पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

पहले स्थायी मरम्मत का लक्ष्य 30 नवंबर तक बताया गया था, लेकिन अब मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद जनवरी 2027 तक काम पूरा करने का लक्ष्य सामने आया है। अक्टूबर से जनवरी तक बेली ब्रिज हटाने, क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत और अन्य तकनीकी कार्य किए जाएंगे।
सेतु बंद हुआ तो गंगा में चलेंगे यात्री जहाज
विक्रमशिला सेतु बंद रहने के दौरान भागलपुर और नवगछिया के बीच आवागमन बनाए रखने के लिए नदी परिवहन को वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में तैयार किया जा रहा है। अब तक सात यात्री जहाजों के संचालन के लिए आवेदन प्राप्त होने की जानकारी है। मालवाहक जहाजों के संचालन के लिए भी आवेदन प्रक्रिया जारी है।
20 सितंबर के बाद जिला प्रशासन की बैठक प्रस्तावित है। इसमें सेतु बंद करने और नदी मार्ग से वैकल्पिक आवागमन की व्यवस्था को अंतिम रूप दिया जा सकता है।
यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जहाजों पर गोताखोर, लाइफ जैकेट और सुरक्षा बलों की व्यवस्था की जाएगी। त्योहारों के दौरान बढ़ने वाली भीड़ को देखते हुए नदी मार्ग पर विशेष निगरानी रखने की तैयारी है।
ओवरलोड ट्रकों पर भी होगी सख्ती
बाबूपुर और हाई लेवल घाट पर ओवरलोड वाहनों के खिलाफ विशेष अभियान चलाने की तैयारी है। मालवाहक जहाज संचालकों को ट्रकों के लोडिंग बिल की जांच करने का निर्देश दिया जाएगा। ओवरलोड पाए जाने पर संबंधित वाहन को गंगा पार नहीं कराया जाएगा।
इस व्यवस्था का उद्देश्य सेतु बंद रहने के दौरान नदी परिवहन को सुरक्षित और व्यवस्थित रखना है।
टोल कलेक्शन में भी भारी गिरावट
विक्रमशिला सेतु के बंद रहने और बाढ़ की स्थिति का असर एनएचएआई के बायपास टोल प्लाजा के कलेक्शन पर भी पड़ा है। जानकारी के अनुसार, सेतु बंद होने के बाद टोल कलेक्शन में करीब 79.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। बाढ़ के बाद इसमें 38.46 प्रतिशत की अतिरिक्त गिरावट बताई गई है।
स्थिति को देखते हुए एनएचएआई ने टोल एजेंसी से ली जाने वाली दैनिक राशि करीब 6.25 लाख रुपये से घटाकर 1.30 लाख रुपये कर दी है। इसके बावजूद एजेंसी को प्रतिदिन करीब 80 हजार रुपये तक का टोल ही मिल पा रहा है।
अब अस्थायी व्यवस्था से स्थायी समाधान की ओर
विक्रमशिला सेतु का हिस्सा क्षतिग्रस्त होने के बाद लोगों की आवाजाही जारी रखने के लिए बेली ब्रिज तैयार किया गया था। जून में इसके जरिए सीमित आवागमन शुरू हुआ था। अब बेली ब्रिज हटाकर पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से की स्थायी मरम्मत का रास्ता साफ किया जा रहा है।
आने वाले महीनों में प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती होगी। एक तरफ विक्रमशिला सेतु की मरम्मत को तय समय में पूरा कराना होगा, वहीं दूसरी तरफ त्योहारों के बीच भागलपुर-नवगछिया के बीच यात्रियों और माल परिवहन के लिए सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था बनाए रखना होगा।
