पटना. यूपी बॉर्डर चौसा से कटिहार के मनिहारी तक करीब 600 किलोमीटर दूरी में गंगा नदी में डॉल्फिन की गिनती होगी। जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया पटना 18 नवंबर से चौसा से गिनती शुरू करेगा। 12 दिसंबर 2018 को मोकामा में गिनती समाप्त होगी। तिलका मांझी यूनिवर्सिटी की टीम 15 नवंबर से 2 दिसंबर के बीच मोकामा के सिमरिया घाट से कटिहार के मनिहारी तक सर्वे करेगी।

सर्वे में करीब 22 लाख रुपया खर्च किया जाएगा। राज्य सरकार को सर्वे रिपोर्ट मार्च 2019 में सौपी जाएगी। डॉल्फिन की गिनती करीब 6 साल बाद हो रही है। इससे पहले वर्ष 2006 और 2012 में चौसा से साहेबगंज तक सर्वे हुआ था। 2012 की रिपोर्ट अनुसार करीब 1600 से अधिक डॉल्फिन गंगा नदी में देखी गई है।

कहां डॉल्फिन को खतरा है, जीपीएस बताएगा जगह

गिनती के दौरान गंगा नदी में कहां-कहां डॉल्फिन को खतरा है, इसकी जगह चिन्हित की जाएगी। हर मोटर बोट में जीपीएस लगाया जाएगा। वैज्ञानिक गिनती के साथ-साथ अन्य जलीय जीवों की जानकारी प्राप्त करेंगे। गंगा नदी, गंडक नदी, कोसी नदी और महानंदा नदी में सिल्ट, गंदा पानी, मछुआरों व हुगली से बनारस तक चलने वाले मालवाहक जहाजों से डॉल्फिन को कैसे खतरा है, इसका भी आकलन किया जाएगा। नदी में जिस जगह पर डॉल्फिन है उसकी गहराई भी नापी जाएगी। डॉल्फिन संरक्षण कैसे बेहतर हो सकता है इस पर सरकार और वैज्ञानिकों के बीच बात होगी।

जर्मनी के टेंट में दियारा में रात गुजारेंगी दोनों टीम

डॉल्फिन के लिए 11 सदस्यीय टीम बनेगी। इसमें चार शोधकर्ता होंगे। 24 दिनों तक गंगा नदी में जलीय जीव-जन्तु का अध्ययन करेंगे। इसके लिए तीन मोटर बोट होगा। जहां शाम होगी वहीं दियारा में टीम रात गुजारेंगी। टीम को रहने के लिए जर्मनी से टेंट हाउस लाया गया है। टेंट जीपीएस सहित अन्य अत्याधुनिक सिस्टम से लैस रहेगा। इसमें चार शोधकर्ताओं के साथ-साथ तीन मछुआरा, दो बोट ड्राइवर, एक हेल्पर और एक खाना पकाने वाले रहेंगे। गिनती की जिम्मेवारी जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया पटना को दी गई है। मौसम की वजह से समय बढ़ भी सकता है। सर्वे टीम गंगा नदी के किनारे ठहरने के लिए 11 से 14 नवंबर के बीच जगह का जायजा लेगी। शोधकर्ता सहित करीब 14 लोग टीम में शामिल होंगे।

डॉल्फिन को बचाने के लिए सरकार का यह अच्छा प्रयास है। सर्वे हमेशा होते रहने से डॉल्फिन के सरंक्षण एवं संवर्धन में मदद मिलेगी।- डाॅ. गोपाल शर्मा,वैज्ञानिक जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया पटना सरकार डॉल्फिन के प्रति जागरूक हुई है। अगर गंगा नदी में डॉल्फिन नहीं है तो समझिए गंगा नदी पर खतरा है। 15 नवंबर को कटिहार के मनिहारी से सर्वे शुरू होगा । डाॅ. सुनिल कुमार चौधरी, तिलका मांझी यूनिवर्सिटी, भागलपुर

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By न्यूज़ डेस्क

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