पटना. पटना एम्स में 24 घंटे के अंदर शहर के गोसांई टोला की रहने वाली कोरोना संक्रमित बच्ची की मौत हो गयी, तो शुक्रवार को चार साल की कोरोना संक्रमित एक दूसरी बच्ची भर्ती हुई. सिया कुमारी नाम की यह बच्ची सारण जिले के मिर्जापुर गांव की रहने वाली है.

एम्स के सूत्रों ने बताया कि बिहटा के दिलवारापुर के सात वर्षीय कोरोना संक्रमित शिवांशु कुमार का भी इलाज चल रहा है. एम्स के डॉक्टर बच्चों में मिल रहे कोरोना के मामलों को लेकर गंभीर हैं. बिहटा के शिवांशु को बुखार और दूसरी परेशानियों के बाद एम्स में 31 अगस्त को दाखिल कराया गया था. यहां भर्ती सिया कुमारी का इलाज छपरा के एक निजी अस्पताल में चल रहा था. वहां से उसे रेफर कर दिया गया. जांच में वह कोरोना पॉजिटिव पायी गयी.

बच्ची में कोरोना का कौन-सा वेरिएंट है, इसकी जांच के लिए अभी सैंपल लिया गया है. कोरोना की तीसरी लहर के खतरे के बीच अस्पताल प्रशासन इसे संभावित केस मान रहा है. गुरुवार को पटना एम्स में भर्ती गोसांईं टोला पाटलिपुत्र निवासी 11 वर्षीय आरोही कुमारी की कोविड से मौत हो गयी थी.

परिजनों का भी लिया गया सैंपल

डॉक्टरों ने पीड़ित बच्ची का रिपीट सैंपल लेने के साथ ही उसके परिजनों का सैंपल भी आरटी-पीसीआर जांच के लिए भेजा है. वहीं, पटना एम्स के कोविड वार्ड के नोडल पदाधिकारी डॉ संजीव कुमार ने बताया कि बच्ची को तेज बुखार, खांसी-जुकाम के साथ पेट में पानी भरने की परेशानी है. हालांकि, ऑक्सीजन सैचुरेशन नियंत्रण में है.

बच्ची की देखभाल के लिए विशेष टीम लगायी गयी है. वायरस के वेरिएंट का पता लगाने के लिए सैंपल लिया गया है. उम्मीद है कि इसे आइसीएमआर भी भेजा जायेगा. उन्होंने कहा कि अभी दो बच्चे संक्रमित मिले हैं और इस आधार पर इसे तीसरी लहर की आहट कहना जल्दीबाजी होगी. विशेषज्ञ डॉक्टर बच्चों के मामलों को देख रहे हैं और सभी तरह की रिपोर्ट मिलने के बाद ही किसी नतीजे पर पहुंचना बेहतर होगा.

सतर्क रहने की है जरूरत

जानकारों का कहना है कि जब बच्चों के स्कूल खुल गये हैं, ऐसे में ज्यादा सावधानी की जरूरत है. घर से स्कूल जाने के दौरान कोविड गाइडलाइन का सख्ती से पालन करने की आवश्यकता है. करीब तीन महीने से कोरोना की तीसरी लहर पर देश भर में चर्चा हो हो रही है, खास कर बच्चों के लिए इस लहर को खतरनाक बताया जा रहा है. हालांकि, एक्सपर्ट ने तीसरी लहर जैसी आशंकाओं को खारिज कर दिया है. उनका कहना है कि बच्चों के लिए घर या स्कूल में सतर्कता बरतने की सलाह दी है.

प्राइवेट अस्पतालों में कोरोना जांच कराने में बच्चों को हो रही परेशानी

बच्चे वायरल फीवर के साथ कई अन्य बीमारियों से ग्रसित होकर अस्पतालों में भर्ती हो रहे हैं. इस बीच सरकारी व प्राइवेट अस्पतालों में डॉक्टर वायरल फीवर से पीड़ित बच्चों की कोरोना जांच भी कराने को बोल रहे हैं. सरकारी अस्पतालों में बच्चों की कोरेाना जांच हो रही है. लेकिन शहर के अधिकतर ऐसे प्राइवेट अस्पताल हैं, जहां परिजनों को कोरोना जांच कराने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

परिजनों की मानें, तो अगर प्राइवेट अस्पताल के पास में ही कोरोना जांच की सुविधा मुहैया कराते, तो मौके पर ही कोरोना जांच हो जाती. हालांकि, शहर के कुछ बड़े अस्पताल परिसरों में ही रैपिड एंटीजन किट से जांच की जाती है. लेकिन, परिजनों का कहना है कि सभी प्राइवेट अस्पतालों में 50 रुपये फीस लेकर जांच की सुविधा की जाये, तो परिजनों को भटकना नहीं पड़ेगा.

पांच जिलों में छह पॉजिटिव मिले

शुक्रवार को राज्य के पांच जिलों में कोरोना के छह नये संक्रमित पाये गये. पटना में दो और दरभंगा, कैमूर, पूर्णिया व सीतामढ़ी जिले में एक-एक संक्रमित पाये गये. वहीं, एक लाख 67 हजार 874 सैंपलों की जांच की गयी. राज्य में अब सिर्फ 79 कोरोना के एक्टिव केस रह गये हैं, जबकि रिकवरी रेट 98.65% है. इधर, राज्य में शुक्रवार को 66,876 लोगों को कोरोना का टीका दिया दिया. सबसे अधिक पटना में 25,910 लोगों को टीका लगा.

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By न्यूज़ डेस्क

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