नवगछिया : इस बार तीन अक्टूबर से शारदीय नवरात्र शुरू होकर 12 अक्टूबर को विजयादशमी के साथ संपन्न होगा। इस बार मां दुर्गा डोली पर आएंगी और चरणायुध यान यानी मुर्गा पर जाएंगी। शारदीय नवरात्र पर नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। पंडित बताते हैं कि इस बार तीन अक्टूबर को पूरे दिन कलश स्थापित कर सकते हैं।

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जहां तक अमृत मुहूर्त का सवाल है तो वह समय प्रातः 7:16 बजे से 8:42 बजे तक और सर्वोत्तम अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:12 बजे से 11:58 बजे तक विशेष फलदायक है। कलश स्थापना सदैव पूजा घर के ईशान कोण में करना चाहिए। ज्योतिषाचार्य पंडित मनोज कुमार मिश्र ने बताया यदि रविवार और सोमवार को शारदीय नवरात्र शुरू होती है तो उस वर्ष मां हाथी पर आती हैं।

और शनिवार व मंगलवार को पूजा शुरू होने पर मां घोड़े पर, गुरुवार और शुक्रवार रहने पर मां डोली पर एवं बुधवार के दिन पूजा शुरू होने पर मां दुर्गा नौका पर आती हैं। बताया कि 10 अक्टूबर को मां दुर्गा के पट खुलेंगे। पत्रिका प्रवेश, निशा पूजा, भगवती का आह्वान होगा। मिथिला पंचांग के अनुसार 11 अक्टूबर को महाष्टमी- महानवमी रात्रि अंत तक है।

इस दिन महानवमी पूजा, त्रिशूलनी पूजा, बलि, हवन पूजन होगा। 12 अक्टूबर शनिवार को विजया दशमी है। जयंती धारण, प्रतिमा विसर्जन, नीलकंठ दर्शनकियाजाएगा। काली मंदिर के रामजी मिश्रा ने बताया कि ज्योतिष के अनुसार जिस वर्ष माता का आगमन डोली पर होता है तो उस वर्ष देश में रोग, शोक, प्राकृतिक आपदा आती है। माता का कैलाश प्रस्थान इस वर्ष चरणायुध की सवारी होगी। ऐसी स्थिति में लोगों में तबाही की स्थिति रहेगी। पंडित बताते हैं कि जब मां दुर्गा का आगामन हाथी पर होता है, तो अधिक वर्षा होती है।

By न्यूज़ डेस्क

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