नवगछिया : नवगछिया अनुमंडल अंतर्गत खरीक प्रखंड के उस्मानपुर-मिरजाफरी के मध्य बिंदु पर स्थित कलबलिया धार किनारे निर्मित जिले के एकलौते सूर्य मंदिर की महिमा अपरंपार है। करीब सौ वर्ष पुराने इस मंदिर में सच्चे दिल से दस्तक देने वाले श्रद्धालुओं की हर मुरादें अवश्य पूरी होती हैं, ऐसी लोगों की मान्यता है। छठ पूजा के अवसर पर भगवान सूर्य एवं छठी मैया की प्रतिमा बैठाई जाती है। इस मौके पर भव्य मेले का भी आयोजन होता है। मंदिर परिसर में छठ पूजा के अवसर पर दंगल, रामधुन, सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धुनों के बीच छठी मैया की आराधना होती है।
आस्था ऐसी है कि गांव से मीलों दूर दूसरे प्रांतों में भी रहने वाले लोग छुट्टी लेकर छठ पूजा में अपने घर आते हैं और पूरे विधि-विधान व निष्ठा के साथ पूजा-अर्चना करते हैं। लोक आस्था के सबसे बड़े त्योहार छठ पूजा के अवसर पर मैया की प्रतिमा स्थापित होती है। पूजा के बाद मंदिर के पास ही बह रही कलबलिया धार में माता की प्रतिमा का विसर्जन होता है। इलाके के लोग कोई भी शुभ कार्य करने के पूर्व मैया के दरबार में चढ़ावा चढ़ाते हैं एवं मैया के इजाजत के बाद ही कार्य प्रारंभ करते हैं। कार्य संपन्न होने के बाद एकबार फिर मैया के दरबार में हाजिरी देते हैं।

मंदिर में स्थायी पुजारी नहीं, ग्रामीणों के हवाले

इस मंदिर में सामान्यतः मंदिर की तरह कोई स्थायी पुजारी नहीं हैं। अर्थात यह मंदिर पूरी तरह ग्रामीणों के हवाले है। लोगों की आस्था ऐसी है कि यहां लोग रोजाना पूजा-अर्चना करने आते हैं। लोगों के लिए मंदिर का पट सालों भर खुला रहता है। इलाके में अमन-चैन के लिए इस मंदिर का निर्माण कराया गया था। ग्रामीणों ने यहां भगवान सूर्य एवं छठी मैया की प्रतिमा का स्थापना की थी। मेला कमेटी के अध्यक्ष उस्मानपुर निवासी महेंद्र यादव बताते हैं कि मैया के दरबार में सच्चे दिल से आने वाले भक्तों की हर मुरादें अवश्य पूरी होती हैं एवं मैया की जिस पर कृपा हो जाती है, उसका हर कष्ट दूर हो जाता है। मैया की कृपा से कभी कोई संकट नहीं आता है। उन्होंने बताया कि मेले में खर्च होने वाली राशि कहां से और कैसे आती है, इसका कोई अता-पता नहीं चल पाता है। मैया कि कृपा से ही पूरी हो जाती है। लोग इन्हें गृह देवता के रूप में पूजते हैं।

मैया के दरबार में सच्चे दिल से आने वाली नि:संतान महिलाओं की सूनी गोद भी आबाद हो जाती है। ऐसी लोगों की मान्यता है। कहा जाता है कि बड़ी संख्या में ऐसी महिलाओं की सूनी गोद आबाद हो चुकी है। इसके लिए ऐसी महिला को चढ़ावा के रूप में सूप चढ़ाना होता है एवं मैया के दरबार में पूजा-अर्चना करनी पड़ती है। वहीं, इलाके के विभिन्न गांवों के छठव्रती महिलाएं यहां ही पूजा-अर्चना करने आती हैं। जिसके कारण पुरुषों के अलावा महिलाओं की भीड़ भी उमड़ जाती है। वहीं, मेला कमेटी के अध्यक्ष महेंद्र यादव के नेतृत्व में कमेटी के सदस्य पूरे जोरशोर के साथ मेला की तैयारी में जुट गये हैं एवं कलाकार प्रतिमा को अंतिम रूप देने में लगे हैं। छठ गीतों की धुन से पूरा इलाका गुंजायमान हो रहा है। वहीं पूजा-अर्चना के लिए दूसरे प्रांतों में रहने वाले लोगों के आगमन से गांव की चहल-पहल बढ़ गई है।

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By न्यूज़ डेस्क

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