कोसी नदी पर विजय घाट पुल से लोकमानपुर तक प्रस्तावित पुल निर्माण कार्य में तब्दीली की गई है। बिहार राज्य पुल निर्माण निगम ने एलाइनमेंट में बदलाव किया है। पहले बनाए नक्शे में गांव का बड़ा हिस्सा आ रहा था। जिसके विस्थापन, पुनर्वास और मुआवजे की समस्या को देखते हुए एलाइनमेंट को दूसरे हिस्से से जोड़ा गया। यहां गांव-घर नहीं आ रहा है। करीब 43 प्लॉट को वापस किया जाएगा।
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जिला भू-अर्जन पदाधिकारी विनोद कुमार ने बताया कि परियोजना के लिए बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड ने दो मौजे की जमीन अधिग्रहित करने का प्रस्ताव दिया था। इसमें लुकमानपुर मौजा के थाना 29 में 15.84 एकड़ और प्रतापनगर में थाना संख्या 124 में 2.7735 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया जाना था लेकिन अब एलाइनमेंट में बदलाव से लुकमानपुर मौजे की 3.22 एकड़ जमीन वापस की जाएगी। इसके लिए अधियाची विभाग पुल निर्माण निगम लिमिटेड को जानकारी दी गई है। जल्द ही वापसी अधिसूचना (‘डी नोटिस) निकाला जाएगा। बता दें कि यहां 8.4 मीटर चौड़ा व 456 मीटर लंबा पुल सहित 4.62 किमी लंबाई का एप्रोच रोड सहित सड़क का निर्माण किया जाना है। इस पुल सह सड़क के निर्माण पर 44.47 करोड़ की लागत आएगी।
पुल बनने से ये तीन फायदे होंगे
सुविधा 1- करीब 25 हजार की आबादी को होगा फायदा

पुल के बनने से पंचायत की 25 हजार की आबादी को फायदा होगा। उन्हें चचरी पुल के सहारे आवागमन नहीं करना होगा। पुल के बनने से नवगछिया, मधेपुरा व भागलपुर से यह इलाका सीधे जुड़ जाएगा।
सुविधा 2- मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में सहूलियत
बाढ़ के दिनों में ग्रामीणों को तीन महीने तक घरों में कैद रहना पड़ता है। आवागमन सही नहीं होने से मरीज समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाते थे। कई मरीज तो अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ देते थे।
सुविधा 3- पंचायत में रिश्ता करने से कतराते हैं लोग
बरसात में पूरा इलाका जलमग्न रहता है। टापू से बने इस पंचायत के रहने वालों को शादी-ब्याह करने के लिए शहर आना पड़ता है। बाढ़ से घिरे रहने से पंचायत के कई युवक और युवतियों की शादी नहीं हो पाई है। लोग यहां रिश्ते करने से कतराते हैं।
