बिहपुर प्रखंड के जयरामपुर गांव स्थित पुरातात्विक स्थल गुवारीडीह के टीले को बचाने के लिए कोसी तट पर एक किलोमीटर में एंटी इरोजन कार्य शुरू कर दिया गया है। साइट पर कार्य की देखरेख कर रहे प्रवीण कुमार फोर्ड ने कहा कि डेढ़ सौ मीटर तक सिर्फ नदी की सतह पर जियो बैग गेवियन बैंडिंग का कार्य होगा। वहीं टीले के दोनों तरफ करीब आठ सौ मीटर दायरे में जियो बैग गेवियन बैंडिंग से सतही और स्लोप का निर्माण किया जायेगा।


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उन्होंने कहा कि नदी के जलस्तर में वृद्धि होने से पहले ही काम पूरा कराने का लक्ष्य है। कार्य की कुल लागत पांच करोड़ 45 लाख रुपए है। गुवारीडीह टीले को बचाने के लिए कोसी की धारा को मोड़ने की योजना अभी टेंडर की प्रक्रिया में है। जल संसाधन विभाग के कार्यपालक अभियंता अनिल कुमार ने कहा कि धारा को मोड़ने का कार्य 17 करोड़ की लागत से होना है। जल्द ही इस कार्य को भी शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि दोनों कार्य को समाप्त करने की तिथि 15 मई है। साइट पर जल संसाधन विभाग के कनीय अभियंता विजय कुमार कैंप कर रहे हैं।

इधर, सर्च अभियान में फिर मिले कई दुर्लभ अवशेष

गुवारीडीह में जयरामपुर के युवक अविनाश कुमार अपने साथियों के साथ लगातार सर्च अभियान चला रहे हैं। बुधवार को भी कोसी तट से मिट्टी के चमकीले बर्तनों के अवशेष, कई तरह की मोतियां, मृदभांड़ के अवशेष और जीवाश्म मिले। अविनाश कुमार ने कहा कि गुवारीडीह में हुए कार्यों से वे लोग संतुष्ट हैं, लेकिन अब तक यहां थाना खोलने की प्रक्रिया शुरू नहीं की गयी है। उन्होंने कहा कि गुवारीडीह तभी पर्यटन का रूप ले सकता है जब आसपास का इलाका सुरक्षित हो। अविनाश ने कहा कि वे अवशेषों को पॉल्ट्री फार्म में रख रहे हैं। सर्च अभियान में विकास कुमार, राजीव साह, पंकज तिवारी, सुधांशु आदि शामिल हैं।

By न्यूज़ डेस्क

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