नवगछिया : पहले फरक्का बराज का निर्माण किया गया। फरक्का बराज से 27 लाख क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज होता है। जबकि, गंगा जब उफान पर होती है, तो पटना के गांधी घाट पर 30 लाख क्यूसेक पानी होता है। जब तक फरक्का पर बने बराज का रिडिजाइन नहीं किया जाता है और गंगा नदी का गाद नहीं हटाया जाएगा, तब तक गंगा किनारे बसे शहर को बाढ़ जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। यह बातें जल संसाधन मंत्री संजय कुमार झा ने गुरुवार को परिसदन में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कही।


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मंत्री ने कहा कि हमलोग काफी समय से यह मांग कर रहे हैं कि फरक्का बराज का रिस्ट्रक्चर कराए जाने की आवश्यकता है। इसके लिए केंद्र सरकार से भी बात हो रही है। फरक्का में 109 गेट हैं। आठ गेट अब भी नहीं खोले गए हैं। फरक्का बराज पर मैनुअल की जगह टेक्निकल व्यवस्था होनी चाहिए। एक स्वीच आन कर सभी गेट खुल जाए, ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए। यह अंतरराष्ट्रीय मामला है। इसमें बंगलादेश की भी सहमति की जरूरी है। इस कारण हमलोग लगातार केंद्र सरकार से पहल करने का अनुरोध कर रहे हैं।

गंगा से गाद निकालना भी जरूरी है

मंत्री ने कहा कि मैंने नवगछिया में ईस्माइलपुर से बिंदटोली तक हुए कटाव स्थल का भी निरीक्षण किया। कटाव रोकने के लिए जल संसाधन विभाग की टीम लगातार काम कर रही थी। जहान्वी चौक से ईस्माइलपुर तक 10 किलोमीटर तटबंध का काम पूरा कर लिया गया है। जहान्वी चौक से तीनटंगा तक 10.5 किलोमीटर तटबंध का काम भी एक वर्ष के अंदर पूरा कर लिया जाएगा। तटबंध पर जीएसबी (मोटरेबुल) का काम कराया गया है। यह कार्य पूर्ण होने के बाद इलाके के लोगों के लिए ईस्माइलपुर से तीनटंगा तक एक वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध हो जाएगा। इससे 40 किलोमीटर की दूरी भी कम हो जाएगी। तीनों स्लूईस गेट का काम भी जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए।

By न्यूज़ डेस्क

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