प्रखंड के सर्वाधिक बाढ़ प्रभावित पंचायत कौशिकीपुर सहौरा व मदरौनी के लोग रिंग बांध का निर्माण नहीं होने से नाराज हैं। ग्रामीणों ने इसके विरोध में वोट बहिष्कार का निर्णय लिया है। शनिवार को मदरौनी पंचायत के मुखिया अजित कुमार मुन्ना के नेतृत्व में दोनों पंचायत के सैकड़ों लोगों ने रिंग बांध पर प्रदर्शन के बाद वोट बहिष्कार का ऐलान किया। ग्रामीणों का कहना है कि हम तीन दशक से बाढ़ और कटाव का दंश झेल रहे हैं। हर साल घर बाढ़ के पानी में डूब जाता है।
तीन माह तक गांव टापू बना रहता है। बाढ़ से बचाव के लिए हमने प्रशासन, सांसद विधायक से रिंग बांध बनाने की मांग की, लेकिन अब तक इस पर ध्यान नहीं दिया गया है। मुखिया अजीत कुमार मुन्ना ने बताया कि मदरौनी पंचायत की लगभग 60 फीसदी आबादी कटाव से विस्थापित होकर पूर्णिया, कटिहार, भागलपुर, नवगछिया आदि शहरों में शरण लिए हुए है। अब तो यहां नाममात्र ही लोग बचे हुए हैं। गरीब, किसान, मजदूर मधरौ चौक स्थित एनएच 31 किनारे व कटिहार बरौनी रेलखंड के ट्रैक के किनारे झोपड़ी में रहने को मजबूर हैं।

दोनों पंचायतों के 50 प्रतिशत से अधिक परिवार हो चुके हैं बेघर
मदरौनी एवं कौशिकीपुर सहौरा पंचायत के लोग तीन दशकों से बाढ और कटाव का दंश झेल रहे हैं। वर्ष 1987 में कोशी नदी में आई प्रलयंकारी बाढ़ ने इन दोनों पंचायत के सैकड़ों लोगों को बेघर कर दिया। अब तक इन दोनों पंचायतों के लगभग 50% हिस्सा कोसी नदी में समा चुका है ।लोगों का घर बार एवं कीमती उपजाऊ जमीन कट जाने के फलस्वरूप लोग दाने-दाने को मोहताज हैं। लोगों ने बताया कि दोनों पंचायत को बचाने के लिए हर वर्ष सरकार करोड़ों रुपए खर्च कर रही है। मगर कटाव थमने का नाम नहीं ले रहा है। अगर रिंग बांध का निर्माण हो जाता तो दोनों पंचायत के लोग सुरक्षित हो जाते।


