नवगछिया : प्रखंड के ध्रुबगंज गांव में घनी आबादी के बीच स्थित बुढ़िया दुर्गा मंदिर का इतिहास पांच सौ वर्ष से भी अधिक पुराना है। जिसे वर्तमान में पुरानी दुर्गा मंदिर के नाम से जाना जाता है। बताया जाता है कि यह खरीक ही नहीं बल्कि पूरे इलाके का सबसे पुराना व शक्तिशाली मंदिर है। मान्यता है कि मैया के दरबार में सच्चे मन से जो भी भक्त मुरादें मांगते हैं, उनकी मुराद अवश्य पूरी होती है।

जानकार बताते हैं कि गांव के ही सिताबी शर्मा के पूर्वज अपने घर से मजदूरी करने के लिए हर दिन नाव से गंगा नदी पार कर अन्यत्र जाते थे। उसी दौरान एक दिन वे वापस नहीं आए। परिवार के सदस्य समेत गांव वाले उनका अंतिम संस्कार करने की तैयारी कर रहे थे। सातवें दिन गांव के कुछ लोगों की नजर लापता पर पड़ी। इसके बाद उनके आवास पर मैया को स्थापित किया गया। जनसहयोग से भव्य मंदिर का भी निर्माण कराया गया।

प्रतिमा विसर्जन के बाद मैया की चढ़ावे की होती है डाक

मेला कमेटी के सदस्य बताते हैं कि प्रतिमा विसर्जन के अगले दिन शाम में मैया को चढ़ावा में चढ़ाऐ गये चुनरी,साड़ी,जेनऊ, चूड़ी, बिंदी समेत अन्य समानों की बिक्री के मंदिर परिसर में डाक लगाया जाता है।जिसमें गाँव समेत इलाके के विभिन्न गाँवो के बड़ी संख्या में लोग भाग लेते हैं। चढ़ावे की खरीददारी के लिए दामों की खरीददार खुद बोली लगाते हैं।मान्यता है कि जो खरीददारी करते हुए उसका अगले वर्ष तक निश्चित रूप से मनोकामना पुरी होती है।

अष्टमी को खोइंछा भरने के लिए लगती है भीड़

मान्यता है कि नि:संतान महिलाओं की गोद भी सच्चे मन से मैया के दरबार में दस्तक देने से आबाद हो जाती है। अष्टमी के दिन यहां खोइंछा भरने के लिए काफी भीड़ जुटती है। मेला कमेटी के सदस्य सह उप सरपंच ललन कुमर, अलख निरंजन कुमर, भोला शर्मा, राजेश राय, अमरेन्द्र कुमर, मनोज कुमर मेले की तैयारी में जुटे हुए हैं। नवरात्र पर इलाके में मैया की गीत गूंजने लगा है। जिससे वातावरण भक्ति की रस में सराबोर हो उठा है। कलाकार पूजा-पंडाल को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।

📲 Naugachia News WhatsApp Group Join करें
Join Now →

By न्यूज़ डेस्क

न्यूज़ को शेयर करे और कमेंट कर अपनी राय दे.....

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *